आज का राहुकाल/ 10 दिसंबर-16 दिसंबर (दिल्ली)

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नरक चतुर्दशी
अनुवाद उपलब्ध नहीं है |

नरक चतुर्दशी

 

आखिर वो कौन सी बात है कि नरक चतुर्दशी को शास्त्रों ने इतनी महत्ता प्रदान की है, धर्मसिंधु ने तो नरक चतुर्दशी के कुछ नियमों को यतियों और विरक्त साधुओं के लिए भी जरुरी बताया है, ये समझने की बात है

नरक चतुर्दशी के महत्वपूर्ण कृत्यों मे दीपदान का कृत्य है। इस दिन घर और बाहर दीप जलाने चाहिए। नाली पर दीपक जरुर जलाना चाहिए। इस दिन यमराज के नाम से दीपक जला कर यमराज के सात नाम लेने चाहिए। कहते हैं की ऐसा करने से नरक नहीं जाना पड़ता है। मदन पारिजात नामक ग्रन्थ ने वृद्ध मनु के हवाले से यमराज के सात नाम एक श्लोक में बताये हैं। "यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च, वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च। औदुम्बराय दध्नाय नीलाय परमेष्ठिने, वृकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय वै नमः"। आप को भी चाहिए कि यमराज के लिए चार दिए जला कर ऊपर लिखा मंत्र पढ़ कर यमराज को नमस्कार जरुर करें। वर्ष क्रिया कौमुदी के पृष्ठ 459 और निर्णयसिंधु के पृष्ठ 199 पर भी यही सात नाम दिए हुए है। पद्मपुराण में भी ऐसा ही जिक्र है। कुछ विद्वानों की राय में यम के चैदह नाम लेने चाहिए। यमराज के चैदह नामों का जिक्र भविष्योत्तर पुराण (140/10) और हेमाद्रि (व्रत भाग 2 पृष्ठ 352) में देखा जा सकता है। कुछ शास्त्रों मे यम को तर्पण देने का भी विधान है। जो लोग ऐसा करना चाहते हैं उन्हें एक थाली में पानी डाल कर उसमें थोडे से काले तिल डालना चाहिए फिर तीन बार अंजुली से पानी भर कर तर्पण करना चाहिए। तर्पण के समय मंत्र पढ़ना चाहिए। "यमाय नमः यमं तर्पयामि"। पाप और अन्धकार से भरे इस युग में कुछ आदरणीय लोग अभी भी यज्ञोपवीत पहनते हैं, उन महाशयों के लिए इस सिलसिले मे यह सूचना देना जरुरी है कि जिनके पिता जीवित हों उन्हें सव्य होकर तर्पण करना चाहिए और जिनके पिता जीवित न हों उन्हे अपसव्य होकर तर्पण करना चाहिए। सव्य का मतलब है कि यज्ञोपवीत बांये कंधे पर होना चाहिए, जबकि अपसव्य का मतलब है कि यज्ञोपवीत (जनेऊ) दाहिने कंधे पर होना चाहिए।

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