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01 फरवरी 2017, बसंत पंचमी
अनुवाद उपलब्ध नहीं है |

मिलेगा ज्ञान का वरदान


बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार, कुछ भवन का निर्माण, कूप निर्माण, फैक्ट्री का उद्घाटन, विवाह से संबंधित किसी शुभ काम का आरंभ करते हैं । बसंत पंचमी का यह पर्व कला व शिक्षा प्रेमियों के लिये भी खास महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी...

भारत वर्ष में देवी- देवताओं के पूजन की परंपरा अनंत काल से चली आ रही है । हर देवी-देवता के पूजन का अपना एक विशेष महत्व है । किसी की आराधना से धन, किसी की आराधना से सुखी जीवन प्राप्त किया जा सकता है, तो किसी की आराधना से विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है । ज्ञान ही एकमात्र ऐसा शस्त्र है, जिससे मनुष्य अपने जीवन की हर कठिनाई का सामना बड़ी सरलता से कर सकता है, जीवन के हर एक मोड़ पर विजय प्राप्त कर सकता है और ये सब केवल विद्या की देवी वीणा वादिनी मां सरस्वती की पूजा आराधना से ही संभव है। सरस्वती पूजन प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के दिन किया जाता है । इसे श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है । मां सरस्वती ज्ञान की देवी हैं । ज्ञान और वाणी के बिना संसार की कल्पना करना भी असंभव है । अतः मनुष्य ही नहीं, देवता और असुर भी माता की भक्ति भाव से पूजा करते हैं । मां सरस्वती की कृपा से ही कवि कालिदास अदभुत यश और ख्याति अर्जित की थी । वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, शौनक और व्यास जैसे महान ऋषि भी देवी-साधना से ही कृतार्थ हुए थे । मां को विद्यादायिनी एवं हंसवाहिनी जैसे नामों से भी जाना जाता है । सरस्वती पूजा के दिन लोग अपने-अपने घरों में माता की प्रतिमा की पूजा करते हैं । पूजा समितियों द्वारा भी सरस्वती पूजा के अवसर पर भव्य आयोजन किया जाता है । देश के लगभग हर स्कूल कालेज में सरस्वती पूजन का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया जाता है।

कैसे करें सरस्वती पूजन

सरस्वती पूजन में सबसे पहले सरस्वती मां की प्रतिमा को सामने रखें । इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करें । माता को पुष्प और माला से अलंकृत करें । माता को सिन्दूर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें । बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है । ज्ञान की देवी मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं । सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं । बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती का पूजन किया जाए तो अधिक फलदायी होता है क्योंकि शास्त्रों में पीले रंग को मां सरस्वती का पसंदीदा रंग बताया गया है ।

पूजन का समय

बसंत पंचमी का दिन सभी शुभ एवं नवीन कायों के लिये उत्तम माना जाता है। इस दिन किसी भी समय सरस्वती पूजा की जा सकती है, परन्तु सुबह का समय पूजा के लिये श्रेष्ठ माना जाता है ।

पूजन सामग्री

देवी सरस्वती की आराधना एवं पूजा में प्रयुक्त होने वाली सामग्री अधिकांश सफेद होती है । जिसमें दही, मक्खन, धान का लावा, सफेद तिल का लड्डू, पुष्प, सफेद चंदन, सफेद वस्त्र, सफेद आभूषण, मावा का मिष्ठान, घृत, नारियल, नारियल का जल, ऋतु अनुसार फल आदि सामग्री का पूजन में प्रयोग होता है, पूजा स्थल पर गेहूं की बाली, पीला फूल, आम के पत्ते आदि को अर्पण कर मां सरस्वती से ज्ञान वृद्धि व वाणी में मधुरता प्राप्त करने की प्रार्थना करनी चाहिए । जन्म कुण्डली का पंचम भाव विद्या का नैसर्गिक भाव होता है। इसी भाव की ग्रह-स्थितियों पर व्यक्ति का अध्ययन निर्भर करता है । यह भाव दूषित हो तो व्यक्ति की शिक्षा अधूरी रह जाती है। इस भाव से प्रभावित लोग मां सरस्वती के प्राकट्य पर्व बसंत पंचमी पर उनकी पूजा अर्चना कर इच्छित कामयाबी हासिल कर सकते हैं ।

मां को राशि अनुसार पुष्प अर्पित करें

अलग-अलग राशि के छात्र अपनी राशि के शुभ पुष्पों से मां सरस्वती की साधना कर सकते हैं । मेष और वृश्चिक राशि के छात्र लाल पुष्प विशेषतः गुड़हल, लाल कनेर, लाल गेंदे आदि से आराधना करके लाभ उठाएं । वृष और तुला राशि वाले श्वेत पुष्पों तथा मिथुन और कन्या राशि वाले छात्र कमल पुष्पों से आराधना कर सकते हैं । कर्क राशि वाले श्वेत कमल या अन्य श्वेत पुष्प से, जबकि सिंह राशि के लोग जवाकुसुम या लाल गुड़हल से आराधना करके लाभ पा सकते हैं । धनु और मीन के लोग पीले पुष्प तथा मकर और कुंभ राशि के लोग नीले पुष्पों से मां सरस्वती की आराधना कर सकते हैं । यदि आप मंदिर जा रहे हैं, तो उससे पहले आप ”गं गणपतये नमः“ मन्त्र का जाप करें । उसके बाद माता सरस्वती के मन्त्र ”ऊँ ऐं हृीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः“ का जाप करके आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं । इस मन्त्र के जाप से जन्म कुण्डली के लग्न (प्रथम भाव), पंचम (विद्या) और नवम (भाग्य) भाव के दोष भी समाप्त हो जाते हैं।इन तीनों भावों (त्रिकोण) पर महाकाली, सरस्वती और मां महालक्ष्मी का अधिपत्य माना जाता है ।

वीणावादिनी, शुभ्रवसना, मंद-मंद मुस्कुराती, हंस पर विराजमान मां सरस्वती के पूजन से मानव जीवन का अज्ञान रुप दूर होकर, उन्हें ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है । इन मंत्रों का पाठ नित्य करने से विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है-

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला

या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा

या श्वेतपद्यासना।

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