Rahukaal Today/ 25 February 2017 (Delhi)-3 March 2017

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Navratri | Depwali | Navratri Pooja | Indian Festival
Karva chauth
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अटल सुहाग के लिए

भक्तिभाव से मनाएं करवा चौथ

भारत में पति-पत्नी के बीच के सारे पर्व चाहे हरतालिका तीज हो ,मंगलागौरी,जय-पार्वती हो या फिर करवा चौथ सभी त्यौहार शिव पार्वती जी से जुड़े हुए है | अपने पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए किया जाने वाला करवा चौथ का व्रत हर विवाहित स्त्री के जीवन में एक नई उमंग ले कर आता है | कुवांरी लड़की अपने लिए शिव की तरह प्रेम करने वाले पति की कामना करती है | और इसके लिए सोमवार,जय -पार्वती आदि व्रत पूरी आस्था से करती है | करवा कौथ का सम्बन्ध भी शिव और पार्वती से है | करवा चौथ के व्रत का शास्त्रों और पुराणो में मिलता है की यह अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य और दीर्घायु  होने की कामना से किया जाता था | पर्व का स्वरूप थोड़े फेरबदल के साथ अब भी वही है | लेकिन यह पति-पत्नी तकं ही सीमित नहीं है | दोनों चूँकि गृहस्थी रुपी गाडी के दो पहिये है |और निष्ठां की धुरी से जुड़े है | इसलिए उनके संबंधों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है | असल में तो यह पूरे परिवार के हित और कल्याण के लिए है | करवा चौथ का पर्व भारत में उत्तर प्रदेश , पंजाब , राजस्थान और गुजरात में मुख्य रूप से मनाया जाता है | करवा चौथ का व्रत  कार्तिकमास के कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को किया जाता है | करवा चौथ स्त्रियों का सर्वाधिक प्रिय व्रत है | करवा चौथ के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अटल सुहाग , पति की दीर्घ आयु ,स्वास्थ्य एवं मंगलकामना के लिए यह व्रत करती है | वामन पुराण में करवा चौथ व्रत का वर्णन आता है |

करवा चौथ के दिन भारत की हर महिला दिनभर उपवास के बाद शाम के  साल की लड़की 18 से लेकर 75 साल की महिला नई दुल्हन की तरह सजती-संवरती है | करवाचौथ के दिन एक खूबसूरत रिश्ता साल-दर-साल मजबूत होता है | शादीशुदा स्त्रियां अपनी पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए यह व्रता करती है |

करवा चौथ के दिन अब पत्नी ही नहीं पति भी व्रत करते है | यह परम्परा का विस्तार है | करवाचौथ को अब सफल और खुशहाल दाम्पत्य  की कामना के लिए किया जा रहा है | करवाचौथ अब केवल लोक-परंपरा नहीं रह गई है | पौराणिकता के साथ-साथ इसमें आधुनिकता का प्रवेश हो चुका है |

 

करवाचौथ कथा

एक बार अर्जुन नीलगिरि पर तपस्या करने गए | द्रोपती ने  सोचा की यहाँ हर समय अनेक प्रकार की विघ्न - बाधाएं आती रहती है | उनके शमन के लिए अर्जुन तो यहाँ है नहीं ,अतः कोई उपाय करना चाहिए | यह सोचकर उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का ध्यान किया | भगवान वहां उपस्थित हुए तो द्रोपदी ने अपने कष्टों के निवारण हेतु कोई उपाय बताने को कहा | इस पर श्री कृष्ण बोले-एक बार पार्वती जी ने भी शिव जी से यही प्रश्न किया था तो उन्होंने कहा था की करवाचौथ का व्रत गृहस्थी में आने वाली छोटी-मोटी विघ्न -बाधाओं को दूर करने वाला है | फिर श्री कृष्ण ने द्रोपदी को एक कथा सुनाई -

प्राचीनकाल में एक धर्मपरायण ब्राह्मण के सात पुत्र तथा एक पुत्री थी | बड़ी होने पर पुत्री का विवाह कर दिया गया | कार्तिक की चतुर्थी को कन्या ने करवा चौथ का व्रत रखा | साथ भाइयों की लाड़ली बहन को चंद्रोदय से पहले ही भूख सताने लगी | उसका फूल सा चेहरा मुरझा गया | भाइयों के लिए बहन की यह वेदना असहनीय थी | अतः वे कुछ उपाय सोचने लगे | उन्होंने बहन से चंद्रोदय से पहले ही भोजन करने को कहा ,पर बहन न मानी | तब भाइयों ने स्नेह वश पीपल के वृक्ष की आड़ में प्रकाश करके कहा - देखो ! चंद्रोदय हो गया | उठो ,अर्ध्य देकर भोजन करो | बहन उठी और चन्द्रमा को अर्ध्य देकर भोजन कर लिया | भोजन करते ही उसका पति मर गया | वह रोने चिल्लाने  लगी| दैवयोग से इन्द्राणी देवदासियों के साथ वहां से जा रही थी | रोने की आवाज सुन वे वहां गई और उससे रोने का कारण  पूछा |

ब्राह्मण कन्या ने सब हाल कह सुनाया | तब इन्द्राणी ने कहा -तुमने करवाचौथ के व्रत में चंद्रोदय से पूर्व ही अन्न-जल ग्रहण कर लिया ,इसी से तुम्हारे पति की मृत्यु हुई है | अब यदि तुम मृत पति की सेवा करती हुई बारह महीनों तक प्रत्येक चौथ को यथाविधि व्रत करो , फिर करवा चौथ को विधिवत गौरी,शिव,गणेश,कार्तिकेय सहित चन्द्रमा का पूजन करो तथा चंद्रोदय के बाद अर्ध्य देकर अन्न -जल ग्रहण करो तो तुम्हारे पति अवश्य जीवित हो उठेगें | ब्राह्मण कन्या ने अगले वर्ष १२ माह की चौथ सहित विधि पूर्वक करवाचौथ का व्रत किया | व्रत के प्रभाव से उनका मृत पति जीवित हो गया | इस प्रकार यह कथा कहकर श्री कृष्ण द्रोपदी से बोले - यदि तुम भी श्रद्धा एवं विधिपूर्वक इस व्रत को करो तो तुम्हारे सारे दुःख दूर हो जायेंगें और सुख -सौभाग्य ,धन-धान्य में वृद्धि होगी | फिर द्रोपदी ने श्री कृष्ण के कथानुसार करवाचौथ का व्रत रखा | उस व्रत के प्रभाव से महाभारत के युद्ध में कौरवों की हार तथा पांडवों की जीत हुई |

 

द्वितीय कथा

प्राचीन समय में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी | वह अपने पति के साथ नदी किनारे के एक गांव में रहती थी | उसका पति वृद्ध था |  एक दिन वह नदी में स्नान करने करने गया | नदी में नहाते समय एक मगर ने उसे पकड़ लिया | इस पर व्यक्ति करवा-करवा चिल्लाकर अपनी पत्नी को सहायता के लिए पुकारने लगा | करवा पतिव्रता स्त्री थी | आवाज को सुनकर करवा भागकर अपने पति के पास पहुंची और दौड़कर कच्चे धागे से मगर को आन देकर बाँध दिया | मगर को सूत के कच्चे धागे से बांधने के बाद करवा यमराज के पास पहुंची | वे उस समय चित्रगुप्त के खाते देख रहे थे | करवा ने सात सींक ले उन्हें झाड़ना शुरू किया ,यमराज के खाते आकाश में उड़ने लगे | यमराज घबरा गए और बोले -देवी! तू क्या चाहती है ? करवा ने कहा -हे प्रभु ! एक मगर ने नदी के जल में मेरे पति का पैर पकड़ लिया | उस मगर को आप अपनी शक्ति से अपने लोक (नरक) में ले आओ और मेरे पति को चिरायु करो | करवा की बात सुन कर यमराज बोले - देवी! अभी मगर की आयु शेष रहते हुए मैं असमय मगर को मार नहीं सकता | इस पर करवा ने कहा -यदि मगर को मारकर आप मेरे पति की रक्षा नहीं करोगे ,तो मै शाप  देकर आपको नष्ट कर दूंगी | करवा की धमकी से यमराज डर गए | वे करवा के साथ वहां गए जहाँ मगर ने उसके पति को पकड़ रखा था | यमराज ने मगर को मारकर यमलोक पंहुचा दिया और करवा के पति की प्राण रक्षा कर उसे  दीर्घायु प्रदान की | जाते समय वह करवा को सुख-समृद्धि देते गए तथा यह वर भी दिया -जो स्त्री इस दिन व्रत करेगी ,उनके सौभाग्य की मै रक्षा करूँगा | करवा ने पतिव्रत के बल से अपने पति के प्राणो की रक्षा की थी | इस घटना के दिन से करवा चौथ का व्रत करवा के नाम से प्रचलित हो गया | जिस दिन करवा ने अपने पति के  प्राण बचाये थे उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चौथी थी | हे करवा माता ! जैसे आपने करवा के पति के प्राण रक्षा की वैसे ही सबके पतियों के जीवन की रक्षा करना |

 

Karwa Chauth

Karwa Chauth is one of the most popular festival among the Indian married ladies. The married women keep a very strict fast on this day (without eating or drinking water) for the well-being and long life of their husband. The way of celebrating this festival varies in different part of the country. On this day Ladies dress up in beautiful sarries or traditional dresses like brides , apply mehandi and Pray before God to bless them with a happy and healty married life.

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Celebration in Punjab , Rajasthan and Uttar Pradesh :

Karwa Chauth is one of the most popular festival of Punjab. The markets in punjab get flooded with karva chauth items weeks before the festivals. Items like :

  • Bagles
  • Beautiful Sarees
  • Kalire
  • Suits and Dresses
  • Mehandi
  • Hair accesories (Paranda)

In Rajasthan the ladies use karwa(mud utensil) and fill them with rice and wheat and wear there wedding dresses. and pray for a long life of their husbands.

and in Uttar Pradesh women keep the fast for long life of their husbands. They use karwa and reciet stories and earthen lamps. They pray before Mata Gauri and offer Argh to moon and eat food and drink water only after doing so.

In some places Karwachauth is also known as " Vata Purnima"

Day and muhurt :

Karva Chauth is observed during the Kartik Month on the fourth day of Krishna Paksh. This Year It will Fall on 30th October , 2015.

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