Rahukaal Today/ 09 AUGUST 2017 (Delhi)-15 AUGUST 2017

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Gor gor ganpati..., 30 March 2017
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गोर गोर गणपति...

 

भारत रंगों भरा देश है । जिसमें भिन्न-भिन्न संस्कृतियां अपना रंग बिखेरती हैं । हर राज्य की अपनी वेशभूषा, रीति-रिवाज और त्यौहारों में यहां

की संस्कृति झलकती है और सबकी अपनी एक अलग पहचान है । इसी तरह राजस्थान की संस्कृति की भी अपनी एक अनूठी पहचान है...

अपने प्राकृतिक सौंदर्य एवं समृद्ध इतिहास की वजह से ‘म्हारा राजस्थान’ बेहद प्रसिद्ध है । यहां त्योहारों को भरपूर आनंद, उमंग, उत्साह और जोश के साथ बड़े ही रंगीले ढंग से मनाया जाता है । जब हवाओं पर बसंत का मौसम राज कर रहा होता है, तब राजस्थान में रंगोत्सव होली का रंग जमकर छाया हुआ रहता है । यहां होली के दूसरे दिन से 16 दिन तक, यानि चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तीज तक मनाया जाने वाला गणगौर का त्यौहार बड़ा ही प्रसिद्ध त्योहार है । गणगौर का यह त्योहार यहां की संस्कृति में चार चांद लगा देता है । इस त्योहार में स्त्रियां गहनों, खासकर मांग टीका और नथनी और कपड़ों से सज-धज कर ईसर देव (शिव) और गौरी पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति की दीर्घायु के लिये व्रत रखती हैं । पूजा करते हुए दूब से पानी के छींटे देते हुए बड़ा ही सुन्दर गीत ‘गोर गोर गणपति...’ गाती हैं । कुंवारी लड़कियां भी इस दिन व्रत रखकर मनपसंद वर पाने की कामना करती हैं । दरअसल गणगौर माता पार्वती का ही स्वरूप हैं । गणगौर के दिन शिव जी और पार्वती की पूजा के पीछे एक कहानी है । प्राचीन समय में पार्वती ने शंकर भगवान को पति(वर) के रूप में पाने के लिए व्रत और तपस्या की थी । शंकर भगवान पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो गए और वरदान मांगने के लिए कहा । तब पार्वती ने उन्हें ही वर के रूप में पाने की अभिलाषा की । इस तरह से पार्वती की मनोकामना पूरी हो गई और पार्वती माता की शिव जी से शादी हो गयी । तभी से कुंवारी लड़कियां इच्छित वर पाने के लिए और सुहागिन अपने पति की लम्बी आयु के लिए गणगौर की पूजा करती हैं। इन 16 दिनों में नयी नवेली दुल्हन अपने पीहर में अपनी कुंवारी सखी सहेलियों के साथ मिलकर भोर के समय उठ कर अपने घर से दूर एक समूह में सज-धज कर दूब और फूल तोड़कर लाती हैं तथा कुओं से पानी भरकर गाना बजाना करती हुई आती हैं । मिट्टी के ईसर और गणगौर बना कर, उन्हें रंग-बिरंगे कपड़ों से सजाकर पट्टे पर बिठाती हैं और दीवार पर सोलह बिंदियां कुमकुम की, सोलह बिंदिया मेहंदी की और सोलह काजल की बिंदियां प्रतिदिन 16 दिनों तक लगाकर पूजती हैं । हर दिन नाचती हैं, गाती हैं और रोज तरह-तरह के पकवान बनाती हैं । यहां तक कि आपस में दुल्हा-दुल्हन बनकर, स्वांग रचाकर नकली का ब्याह भी रचाती हैं । गणगौर का प्रत्येक दिन विवाहितों व लड़कियों के लिये स्पेशल होता है । इस तरह इन सोलह दिनों का आंनद बड़ी ही खुशी और मनोंरजन के साथ लिया जाता है । गणगौर के दिन राजस्थान में शक्कर पारे, गुणे और मीठे पुए बनाने का चलन है । गणगौर के दिन कई जगहों पर शिव की प्रतिमा के साथ सुसज्जित हाथियों व घोड़ों का जुलूस निकाला जाता है । राजस्थान में हर वर्ष मनाये जाने वाले इस पर्व में भारी संख्या में पर्यटक भी शामिल होते हैं।

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Gor gor ganpati...

India is a country of colours. In this country various cultures and civilizations spread their vibrant colours. Each

state has own dress code, rituals and festivals which reveals its mesmerizing culture. Each of them has their

special recognition. Similarly, the culture and civilization of Rajasthan has its unique identity.


Due to its natural beauty and popular historical culture, our Rajasthan is immensely popular. The festivals are celebrated with lots of pomp and show and immense excitement. Enthusiasm can be felt in its each and every particle. The festivals cite a unique story behind this. On the arrival of spring, Rajasthan is immersed in Holi all over. From the other day of Holi till 16 days i.e. the festival of Gangour is celebrated. It falls during the Shukla paksh of Chaitra month till the Teej festival. This is popularly known as Gangour across Rajasthan. This festival brings the culture of Rajasthan into limelight. During this festival, the women adorn themselves with beautiful jewelleries, especially 'maanteeka' and 'nathani'. They wear attractive new vibrant coloured clothes and worship their deities- Isar Dev, Shiv and Parvati. They keep the fast for the long and blissful life of their husbands. At the time of worship, they sprinkle pious water with doob on the Gods and sing a beautiful song- “Gor Gor Ganpati... Even unmarried girls keep a fast on this day and revere for a desirable husband. Actually the goddess Gangour is the form of Goddess Parvati. There is a popular story behind worshipping Goddess Parvati and Lord Shiva. During ancient era, Goddess Parvati did a strict tapasya and kept fast to get Lord Shankar as her husband. Lord Shankar (Shiva) became happy with Goddess Parvati's tapasya and gave her the desired blessing and both of them got married. From that time, unmarried girls and married ladies keep the fast of Gangour for the long life of their husbands. During these 16 days, the newly married brides stay in their mother's house and go to distant places with the group of their friends after being adorned with jewelleries and clothes and pluck flowers. They also bring water from the distant wells and sing songs on their ways. They prepare Isar and Gangour with mud and dress them with beautiful clothes and keep them on a wooden platform. They stick 16 dots with kumkum, 16 dots with mehandi and 16 dots with kajal for 16 days. They also cook delicious dishes. They sing and dance every day. They even do the affectation like bride and groom and go for fake marriages. Each and every day of Gangour bears special significance for unmarried and married girls. This way, all the 16 days are spent with loads of enjoyment, fun, excitement and happiness. On the day of Gangour, women prepare shakkarparae, gurae and sweet dishes. On many places, people take out the procession of Shiv and Parvati along with well adorned elephants and horses. The festival is celebrated every year with immense excitement and people from various parts of the country visit as tourists to watch this festival.

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