Rahukaal Today/ 21 April 2017 (Delhi)-27 April 2017

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Ganesh Chaturthi
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Ganesh Chaturthi

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Ganpati Video 2015
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17/09/2015 

 

गणेश चतुर्थी

श्री गणेश को सभी देवताओं में सबसे पहले प्रसन्न किया जाता है. श्री गणेश विध्न विनाशक है. श्री गणेश जी बुद्धि के देवता है, इनका उपवास रखने से मनोकामना की पूर्ति के साथ साथ बुद्धि का विकास व कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है. श्री गणेश को भोग में लडडू सबसे अधिक प्रिय है. इस चतुर्थी उपवास को करने वाले जन को चन्द्र दर्शन से बचना चाहिए.

श्री गणेश चतुर्थी व्रत किस प्रकार करना चाहिये

श्री गणेश को चतुर्थी तिथि बेहद प्रिय है, व्रत करने वाले जन को इस तिथि के दिन प्रात: काल में ही स्नान व अन्य क्रियाओं से निवृ्त होना चाहिए. इसके पश्चात उपवास का संकल्प लिया जाता है. संकल लेने के लिये हाथ में जल व दूर्वा लेकर गणपति का ध्यान करते हुए, संकल्प में यह मंत्र बोलना चाहिए.

"मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये"

इसके पश्चात सोने या तांबे या मिट्टी से बनी प्रतिमा चाहिए. इस प्रतिमा को कलश में जल भरकर, कलश के मुँह पर कोरा कपडा बांधकर, इसके ऊपर प्रतिमा स्थापित की जास्ती है. फिर प्रतिमा पर सिंदूर चढाकर षोडशोपचार से उनका पूजन किया जाता है.

आरती

JAI GANESH JAI GANESH JAI GANESH DEVA
MATA JAKII PARVATII, PITAA MAHAADEVA
EKA DANTA DAYAVANTA, CAAR BHUJA DHAARII
MATHE SINDUURA SOHAI, MUUSE KII SAVARI
JAI GANESH...

ANDHANA KO AANKHA DETA
KORHINA KO KAAYAA
BANJHANA KO PUTRA DETA
NIRDHANA KO MAAYA
JAI GANESH...

PAANA CARHE, PHUULA CARHE
AURA CARHE MEVA
LADDUAN KO BHOGA LAGE
SANT KAREN SEVA
JAI GANESHA...

 

Out of this keep 5 Ladoos in Lord ganeshays feet and distribute the rest to people attending the pooja 

 

 


 

शत्रु विनाश

" ऊँ गं गणपतये वरवरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा "

यह मन्त्र १०,००० की संख्या में जपने से फायदा देता हैं " लाख जपने से सिद्ध हो जाता हैं | लाल कपड़े पहन कर लाल चन्दन की माला लेकर उत्तर की ओर मुहं करके जपने से काम बनता हैं

हमारे जीवन में दिन दुनी रात चौगुनी बढती प्रतिस्पर्धा की वजह से हमें कई जगह अनायास ही शत्रुता और विरोध का सामना करना पड़ता हैं |

हालांकि हम शान्ति के पुजारी हैं | लेकिन कुरु क्षेत्र में धर्म संकट आने पर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करने की प्रेरणा दी थी  | हमें भी , ऑफिस में कॉलेज में व्यापर में बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्पोरेट वार में उलझना ही पड़ता हैं |

ऑफिस - श्री गणेश की प्रतिमा के आगे २१ मखाने रख कर उनके आगे २४ बार यह मन्त्र पढकर गणेश जी के आगे हवन कर दें | ऑफिस में आपके     प्रतिद्वन्दी धूल चाटते नजर आयेंगे |

कॉलेज – अगर आप छात्र हैं तो आपकी भी कभी कभी चाही अनचाही समस्याओं का सामना करना पड़ता होगा | आपके लिये उचित हैं  कि गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी का जल लाकर घर में रखें थोडा सा जल एक कटोरी में निकाल कर गणेश जी के आगे रखें | इस जल से मुंह धोकर आप कॉलेज जायें | आप जिन्दगी की दौड़ में सबसे आगे निकल जायेंगें |

खेल का मैदान -

खिलाड़ियों को भी कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझना पड़ता हैं | खिलाडियों के लिये उचित हैं कि भोज पत्र पर लाल चन्दन और अनार की कलम से यह मन्त्र लिख कर चतुर्दशी के दिन यानि १९ जुलाई को लाल कपड़े में करके या तांबे के ताबीज में भर कर इसे अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें |

व्यापार - आजकल हर किसी को जबरदस्त बिजनेस राइवलरी का सामना करना पड़ता हैं उसमें  सफलता पाने के लिये व्यापारियों को चाहिये कि ७० ग्राम क्त्त्था बाजार से लाकर उसका चुरा करें उसमें घी सिन्दूर , और शहद मिलाकर गणेश की प्रतिमा बनायें इस प्रतिमा पर तीन दिन तक उक्त मन्त्र की एक माला जप करके चतुर्दशी के दिन यानि  १९ जुलाई के दिन तांबे के खोल में भरकर यह प्रतिमा अपने बिजनेस ऑफिस के दरवाजे पर भीतर की तरफ लटका दें | आपका व्यवसाय दिन दूना रात चौकुना बढ़ेगा |

लव रिवेलोरी -

अपने प्रेमी या प्रेमिका की फोटो पर अपने अंगूठे के बराबर गणेश की प्रतिमा रख कर तीन दिन तक चार माला जप करें | चतुर्दशी के दिन इस फोटो के पैरो से नीचे जमीन पर अपने प्रतिद्वन्दी का नाम लिख कर उसे हाँथ से मिटा दें | आपको प्रेम से प्रति प्रतिद्वन्दिता दूर हो जायेगी |

कारपोरेट वार -

अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धाओं में आगे बढने के लिये सफेद मदार की अंगूठे के बराबर प्रतिमा बनाकर उसपर ८ माला नित्य जप करें १९ जुलाई को इसे किसी मेटल के कवर में करके अपने ऑफिस में रख लें |

आप विजेता रहेंगें |

 


 

राशि

मेष - भागदौड बढ़ेगी यात्रा में स्वास्थ्य पर ध्यान दें ऑफिस में मतभेद हो सकता हैं

वृष - कैरियर तेज़ी से बढ़ेगा कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होगी आपकी मेहनत से लोग हैरान होंगे

मिथुन - व्यापारिक संबंध बनेंगे घर में सावधानी बरतें विदेश यात्रा की संभावना

कर्क - पुरानी मनोकामना पुरी होगी जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें अफरा -तफरी के माहौल से बचें

सिंह - शुभ संदेश मिलेगा कैरियर  में बदलाव हो सकता हैं आमदनी में बढ़ोतरी होगी मानसिक परेशानी बनी रहेगी

कन्या - व्यकितत्व में निखार आएगा आमदनी में बढ़ोतरी होगी समाजसेवा से संतोष मिलेगा

तुला - गुस्से से नुकसान हो सकता हैं दोस्त -दुश्मन की पहचान ठीक से करें जमीन संबंधी विवाद से बचें

वृश्चिक - प्रेम संबंध अच्छे होंगे करियर में नई संभावना होगी | व्यापारियों को लाभ होगा

धनु - सुख सम्रद्धि मिलेगा कार्य क्षेत्र में सम्मान बढ़ेगा पैत्रिक मामले हल होंगे

मकर - शिक्षा में कामयाबी मिलेगी मेडिकल के लोगों को फायदा इंजीनियर्स का तबादला मुमकिन

कुंभ - मीडिया - टेलीकम्युनिकेशन में तरक्की चमड़ा उधोग में लाभ मिलेगा | विदेश व्यापार की संभावना

मीन - नई नौकरी की संभावना भाई - बहनों का विवाह मुमकिन बच्चों से संबंधित जिम्मेदारियां पुरी होंगी |


कैसे मनाएं गणपति को ?

 

मेष - गणेश जी को सफेद तिल के लड्डू चढाएं

वृष - खोए से बने लड्डू चढाएं

मिथुन - मुंग की दाल के लड्डू चढाएं

कर्क - छैने के लड्डू चढाएं

सिंह - गणेश जी को पंजीरी चढाएं

कन्या - पिस्ते की बर्फी चढाएं

तुला - मलाई के लड्डू चढाएं

वृश्चिक - लाल खोए से बने लड्डू चढाएं

धनु - बेसन के लड्डू गणपति को भेंट करें

मकर - काले तिल से बने लड्डू गणेश जी को चढाएं

कुंभ - काले तिल और खोए के लड्डू चढाएं

मीन - चने की दाल से बने लड्डू विध्नहर्ता को चढाएं


गणेश चतुर्थी पर क्या न करें

 

मेष -ऑफिस में बॉस से न उलझे

वृष - पत्नी या प्रेमिका से झगड़ा न करें

मिथुन -अपनी बेटी से न उलझे

कर्क - मां से झगड़ा न करें

सिंह - पिता से झगड़ा न करें

कन्या - बहन से झगड़ा न करें

तुला - पत्नी से झगड़ा न करें

वृश्चिक -भाई से झगड़ा न करें

धनु - पुरोहित से झगड़ा न करें

मकर - किसी बुजुर्ग से झगड़ा न करें

कुंभ - अपने दादा से झगड़ा न करें

मीन - गुरु से युद्ध न करें

गणपति की पूजा-आराधना सनातन काल से सर्वप्रथम की जाती रही है। महाकवि तुलसीदास ने विद्या वारिधि, बुद्धिविधाता ही नहीं, विघ्नहर्ता व मंगलकर्ता •ाी इन्हें प्रतिपादित किया हैं। क्योंकि श्रीगणेश समस्त देवताओं में अग्रपूज्य हैं, इसलिए उन्हें विनायक •ाी कहा जाता है। साधारण पूजन के अलावा किसी •ाी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए गणपति के विशेष रूप का ध्यान, जप ओर पूजन किया जाता है। महाराष्टÑ में •ााद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को यह गणेश-उत्सव धूमधाम से मनाया जाता हैं। जब से इस त्योहार को लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक स्वरूप दिया है तब से इसकी •ाव्यता देखने योग्य होती है।

गणपति की मूर्ति मिट्टी से बनायी जाती है और घर लाते समय उन्हें एक थाली में रूमाल से ढक कर इस तरह लाया जाता है कि उनका मुँह हमारी तरफ रहे। गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की स्थापना की जाती है। पूजा करते समय हो सके तो लाल रंग का रेशमी वस्त्रपहना जाता है। पाँच फल रखे जाते हैं। चंदन, फूल-पत्ते, शमी पत्र, दूर्वा और जनेऊ चढ़ाया जाता है। गुड़ और सूखे नारियल का •ोग लगाया जाता है। बाद में गणेश अथवर्शीर्ष का पाठ किया जाता है और आरती की जाती है। जितने •ाी दिन गणेश पूजा घर में हैं उतने दिन सुबह-शाम आरती और मिष्ठान्न का •ोग लगाया जाता है।

मोदक का •ोग गणेश पूजा का सबसे बड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी बड़ी रोचक कहानी है। एक बार माता पावर्ती के पास स्कंद और गणेश, दोनों •ााइयों ने मोदक के लिये जिद की। पावर्ती ने कहा, यह महाबुद्धि मोदक है, लेकिन है तो एक ही, जो •ाी इसे खायेगा वह सारे जगत में बुद्धिमान कहलायेगा। जो पहले पृथ्वी प्रदक्षिणा कर के आयेगा उसे ही यह मिलेगा। मोदक की चाहत में स्कंद तो पृथ्वी प्रदक्षिणा करने के लिये निकला लेकिन गणेश वहीं रूका रहा। उसने अपने माता-पिता की ही पूजा कर उन्हीं की प्रदक्षिणा की और मोदक के लिये हाथ आगे बढ़ाया।

माता-पिता की प्रदक्षिणा याने पृथ्वी और अकाश की प्रदक्षिणा। सर्व तीर्थों में स्नान, सब •ागवानों को नमन, सब यज्ञ, व्रत, कुछ •ाी कर लें लेकिन माता-पिता की पूजा से मिले हुए पुण्य की तुलना किसी से •ाी नहीं हो सकती। गणेश का यह स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिये गया।

शंकर-पार्वर्ती ने गणेश की कुशाग्र बुद्धि को जान लिया और मान •ाी लिया कि यही बुद्धि का देवता बनेगा। तब से मोदक गणेश •ागवान को चढ़ाये जाते हैं।  महाराष्ट्र में अष्टविनायक दर्शन बड़ा ही शु•ा और पावन माना जाता है। यह निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं- श्री मोरेशवर मोरगाँव में, श्री चिंतामणी थेऊर में, श्री बल्लेश्वर पाली में, श्री वरदविनायक महड में, श्री गिरिजात्मज, लेण्यादि में, श्री विघ्नेश्वर ओझर में, श्री महागणपती रांजणगाँव में तथा श्री सिद्धिविनायक सिद्धटेक में।

सार्वजनिक गणेश उत्सव में दस दिन दोनों समय सामूहिक आरती के साथ मनोरंजक कार्यक्रम •ाी होते हैं। श्री लोकमान्य तिलक ने इस उत्सव को लड़ाई-झगड़े छोड़, मनमुटाव को दूर कर एकता की •ाावना से मनाने के लिये विस्तृत और सार्वजनिक रूप दिया था। •ाारत के स्वतंत्रता संग्राम में एकता और स्वतंत्रता की •ाावना को जगाने के में इसका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। यह उत्सव दस दिन का होता है लेकिन अपने अपने घरों में लोग डेढ़ दिन, पाँच दिन या फिर सात दिन बाद •ाी विसर्जन करते हैं। श्री महागणपति, षोडश स्त्रोत माला में आराधकों के लिए गणपति के सोलह मूर्त स्वरूप बताए गए हैं, जो •िान्न-•िान्न कार्यों के साधक हैं।

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बाल गणपति

ये चर्तु•ाुज गणपति हैं। इनके चारों हाथों में केला, आम, कटहल, ईख तथा सूँड में मोदक होता है। यह गणपति प्रतिमा अरुण वर्णीय लाल आ•ाायुक्त होती हैं। नि:संतान दंपति इनकी आराधना से संतान सुख प्राप्त करते हैं, ऐसी शास्त्रीय मान्यता हैं।

तरूण गणपति

यह गणपति की अष्ट•ाुजी प्रतिमा हैं। उनके हाथों में पाश, अंकुश, कपित्थ फल, जामुन, टूटा हुआ हाथी दाँत, धान की बाली तथा ईख आदि होते हैं। इनकी •ाी हल्की लाल आ•ाा होती हैं। युवक-युवतियाँ अपने शीघ्र विवाह की कामना के लिए इनकी आराधना करते हैं।

ऊर्ध्व गणपति

इस गणपति विग्रह की आठ •ाुजाएँ हैं। देह का वर्ण स्वर्णिम हैं। हाथों में नीलोत्पल, कुसुम, धान की बाली, कमल, ईख, धनुष, बाण, हाथी दांत और गदायुध हैं। इनके दाहिनी ओर हरे रंग से सुशो•िात देवी •ाी हैं। जो •ाी व्यक्ति त्रिकाल संध्याओं में इन गणपति विग्रहों में से किसी की •ाी •ाक्तिपूर्वक उपासना करता है, वह अपने शु•ा प्रयत्नों में सर्वदा विजयी रहता है।

•ाक्त गणपति

गणपति की इस प्रतिमा के चार हाथ हैं, जिनमें नारियल, आम, केला व खीर के कलश सुशो•िात होते हैं। इस गणपति प्रतिमा का वर्ण पतझड़ की पूर्णिमा के समान उज्ज्वल श्वेत होता है। इष्ट प्राप्ति की कामना से इनकी आराधना की जाती है।

वीर गणपति

यह प्रतिमा सोलह •ाुजाओं वाली होती हैं। इनकी छवि क्रोधमय तथा •ायावनी हैं। शत्रुनाश एवं संरक्षण के उद्देश्य से की गई इनकी आराधना तत्काल ला•ा पहुँचाती है।

शक्ति गणपति

इस प्रतिमा की बाँई ओर सुललित ऋषि देवी विराजमान होती है, जिनकी देह का रंग हरा हैं। संध्याकाल की अरूणिमा के समान धूमिल वर्ण वाले इन गणपति के दो ही •ाुजाएँ हैं। सुख, समृद्धि, •ारपूर कृषि व अन्य शांति कार्यों के लिए इनका पूजन अत्यंत शु•ा माना जाता है।

हेरंब विघ्नेश्वर

बारह •ाुजाओं से युक्त हेरंब गणपति की प्रतिमा का दाहिना हाथ अ•ाय मुद्रा व बायां हाथ वरद मुद्रा प्रदर्शित करता है। सिंह पर सवार हेरंब गणपति के पाँच मुख हैं। इनके देह का वर्ण श्वेत है। संकटमोचन तथा विघ्ननाश   के लिए अत्यंत प्रसिद्ध हैं।

लक्ष्मी गणपति

गणपति की इस प्रतिमा के दोनों पार्श्वों में रिद्धि-सिद्धि नामक दो देवियां विराजमान होती हैं। इनके आठ हाथों में तोता, अनार, कमल, मणिजड़ित कलश, पाश, अंकुश, कल्पलता और खड्ग शो•िात हैं। देवियों के हाथों में नील कुमुद होते हैं। सुख, समृद्धि की कामना पूर्ण करने के लिए लक्ष्मी गणपति अति प्रसिद्ध हैं।

महागणपति

द्वादश बाहु वाले महागणपति अत्यंत सुंदर, गजबदन, •ााल पर चंद्र कलाधारी, तेजस्वी, तीन नेत्रों से युक्त तथा कमल पुष्प हाथ में लिए क्रीड़ा करती देवी को गोद में उठाए अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में अधिष्ठित हैं। इनकी देह का वर्ण सुहावनी लालिमा से युक्त हैं। अन्न-धन, सुख-विलास व कीर्ति प्रदान करने वाला महागणपति का यह स्वरूप •ाक्तों की कामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध हैं।

विजय गणपति

अरुण वर्णी सूर्य कांति से युक्त तथा चार •ाुजाओं वाले विजय गणपति की यह प्रतिमा अपने हाथों में पाश, अंकुश, हाथी दांत तथा आम फल लिए हुए हैं। मूषक पर आरूढ़ यह विजय गणपति प्रतिमा कल्पवृक्ष के नीचे विराजमान हैं। अपने किसी •ाी मंगल प्रयास में विजय की कामना से विजय गणपति की आराधना की जाती हैं।

विघ्नराज या •ाुवनेश गणपति

स्वर्णिम शरीर व बारह •ाुजाओं से युक्त यह गणपति प्रतिमा अपने हाथों में क्रमश: शंख, पुष्प, ईख, धनुष, बाण, कुल्हाड़ी, पाश, अंकुश, चक्र, हाथी दाँत, धान की बाली तथा फूलों की लड़ी लिए रहती हैं। इनका पूजन किसी •ाी शु•ा कार्य के प्रारं•ा में करना अत्यंत ला•ादायक होता है।ल्ल

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Watch Indian Astrologer Acharya Indu Prakash's videos to know about Ganesh Chaturathi

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