Rahukaal Today/ 17 March 2017 (Delhi)-23 March 2017

  • Mon
  • Tue
  • Wed
  • Thu
  • Fri
  • Sat
  • Sun
Rahukaal Today
7:53:22 - 9:24:45

8:31:22 - 9:51:45
Rahukaal Today
15:30:45 - 17:02:22

7:14:52 - 8:58:45
Rahukaal Today
12:27:30 - 13:59:22

12:19:30 - 13:57:22
Rahukaal Today
13:59:00 - 15:31:00

13:57:37 - 15:35:45
Rahukaal Today
10:58:15 - 12:29:00

10:42:30 - 12:15:00
Rahukaal Today
9:26:45 - 10:57:37

9:10:30 - 10:42:45
Rahukaal Today
17:01:52 - 18:33:00

16:50:00 - 18:22:00
There are no translations available.

 

Poojit Ganesh Laxmi

For those of you who would like to buy pranpatishtith Ganesh Laxmi , can place their orders now.You can place your orders through phone or through email.

9971000226

दीपावली पूजा के मुहूर्त एवं उपाय 

दीपावली पूजा का पहला मुहूर्त :-  11:21 से 12:05

दीपावली पूजा का दूसरा मुहूर्त :-   17:26 से 19:23

दीपावली पूजा का तीसरा मुहूर्त (महा निशीथ काल ) :- 23:15 से 24:08

श्री महालक्ष्मी पूजन, मन्त्रजाप, पाठ साधन के लिए प्रदोष, निशीथ, महानिशीथ काल व साधनाकाल अनुष्ठानुसार अलग - अलग महत्त्व रखतें हैं |

महानिशीथ काल :- 23:15 से 24 :08

अमृत चौघडिया :- 20:26 से 22:04

स्थिर लग्न सिंह :- 23:54 से 02:08

लाभ की चौघड़िया :- 15:48 से 17:10

समन्वित काल :-

 

कुछ लोग परम्परागत प्रदोष बेला के मुताबिक़ भी पूजा करतें है देखतें हैं क्या है प्रदोष बेला ....

परम्परागत प्रदोष बेला – 17:26 से 19:23

शुभ चौघडिया :- 10:20 से 11:42

18:46 से 20:25

 

अब हम बात करेंगे कि किस दिशा में पूजा करें तो जवाब है पूजा का स्थान ईशान कोण की ओर बनाना शुभ है इस दिशा

 

4 . दीपावली की रात अपनी फेवरेट किताबो में टीका लगा कर दीपक की रोशनी में उन्हें पढ़ना चाहिये उनपर रोली और खील लगाकर रख देना चाहिये | प्रतिपदा के दिन पढाई नहीं करनी चाहिये | भइया दूज की पूजा के बाद दुबारा पढाई सुरु करनी चाहिये |

5 . दीपावली की सुबह शरीर में तेल मालिस करके ही स्नान करना चाहिये | इस दिन - पीपल, गूलर , आम ,बरगद और पाकर के पेड़ो में से जिस - जिस पेड़ की छाल मिल जाय उसे पानी में उबाल कर उस पानी से नहाने से लक्ष्मी प्राप्त होती है और दुर्भाग्य नष्ट हो जाता है |

6 . भविष्योत्तर पुराण के अध्याय - 140 श्लोक 14 से 29 तक , हेमाद्रि के व्रत भाग -2 , पृष्ठ - 348 और 349 क्रियतत्व पृष्ठ - 452 ; वर्ष क्रिया कौमुदी तथा धर्मसिंधिु के पृष्ठ - 107 पर दीपावली के बारे में विस्तार से वर्णन दिया गया है |

7 . दीपावली के दिन दोपहर के बाद पांच लोगों के कुंकुम लगाने , पड़ोसी को खाना खिलाने और घर के दरवाजे पर चावल चिपकाने से -बेरोजगार को भी रोजगार मिलता है और विजनेस में बढ़ोत्तरी होती है |

 

दीपावली

दीपावली प्रकाश उत्सव है । जो सत्य की जीत व आध्यात्मिक अज्ञान को दूर करने का प्रतीक है । दीपावली का शाब्दिक अर्थ है दीपों की पंक्तियां । यह हिंदू कलेन्डर का एक बहुत लोकप्रिय त्यौहार है । यह कार्तिक के 15वें दिन मनाया जाता है । यह त्यौहार भगवान राम के 14 वर्ष के बनवास के बाद अपने राज्य में वापस लौटने की स्मृति में मनाया जाता है । भगवती लक्ष्मी, विष्णु की पत्नी जो कि धन और समृद्धि की प्रतीक हैं । उन्हीं की इस दिन पूजा की जाती है। पश्चिम बंगाल में यह त्यौहार काली पूजा के रूप में मनाया जाता है । काली की पूजा दीवाली के अवसर पर की जाती है । दक्षिण में दीपावली त्यौहार नरकासुर जो असम का एक शक्तिशाली राजा था और जिसने हजारों निवासियों को कैद कर लिया था, पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है । ये श्री कृष्ण ही थे , जिन्होंने अंत में नरकासुर का दमन किया व कैदियों को स्वतंत्रता दिलाई । इस घटना की स्मृति में प्रायद्वीपीय भारत के लोग सूर्योदय से पहले उठ जाते हैं व कुमकुम अथवा हल्दी के तेल में मिलाकर नकली रक्त बनाते हैं । राक्षस के प्रतीक के रूप में एक कड़वे फल को अपने पैरों से कुचलकर विजयोल्लास के साथ रक्त को अपने मस्तक के अग्रभाग पर लगाते हैं। तब वे धर्म, विधि के साथ तैल स्नान करते हैं । स्वयं पर चन्दन का टीका लगाते हैं । मन्दिरों में पूजा अर्चना के बाद फलों व बहुत सी मिठाइयों के साथ बड़े पैमाने पर परिवार का जलपान होता है । राजा बली के सम्बन्ध में दीपावली उत्सव की दक्षिण में एक और कथा है । हिन्दू पुराणों के अनुसार राजा बली एक दयालु दैत्यराज था । वह इतना शक्तिशाली था कि वह स्वर्ग के देवताओं व उनके राज्य के लिए खतरा बन गया । बली की ताकत को मंद करने के लिए विष्णु एक बौने भिक्षुक ब्राह्मण के रूप में आए । ब्राह्मण ने चतुराई से राजा से तीन पग के बराबर भूमि मांगी। राजा ने खुशी के साथ यह दान दे दिया। बली को कपट से फंसाने के बाद विष्णु ने स्वयं को प्रभु के स्वरूप में पूर्ण वैभव के साथ प्रकट कर दिया । उन्होने अपने पहले पग से स्वर्ग व दूसरे पग से पृथ्वी को नाप लिया । यह जानकर कि उसका मुकाबला शक्तिशाली विष्णु के साथ है बली ने आत्म समर्पण कर दिया व अपना शीश अर्पित करते हुए विष्णु को अपना पग उस पर रखने के लिए आमंत्रित किया । विष्णु ने अपने पग से उसे अधोलोक में धकेल दिया । इसके बदले में विष्णु ने समाज के निम्न वर्ग के अंधकार को दूर करने के लिए उसे ज्ञान का दीपक प्रदान किया । उन्होने उसे यह आशीर्वाद भी दिया कि वह वर्ष में एक बार अपनी जनता के पास अपने एक दीपक से लाखों दीपक जलाने के लिए आएगा ताकि दीपावली की अंधेरी रात को अज्ञान, लोभ, ईष्र्या, कामना, क्रोध, अहंकार और आलस्य के अंधकार से दूर किया जा सके । तथा ज्ञान विवेक और मित्रता की चमक लाई जा सके । आज भी प्रत्येक वर्ष दीपावली के दिन एक दीपक से दूसरा जलाया जाता है जो बिना हवा की रात में स्थिर जलने वाली लौ की भांति संसार को शांति व भाइचारे का संदेश देती है|

 

Deepawali


Deepawali is the festival of lights. It is the symbol of truth and victory against ignorance. Deepawali literally means line of lights. It is a much loved festival of the Hindu calendar. It is celebrated on the 15th day of the month of Karthik . It is the celebration of the return of Lord Ram to his kingdom after 14 years of exile

to the forests. Bhagwati Lakshmi, the consort of Lord Vishnu is, the symbol of wealth and is worshipped on this day.

 

Bengal- Goddess Kali is worshipped on this day.

 

North east India – Narkasur was a powerful king of Assam who had imprisoned thousands of people. Deepawali is observed to celebrate the defeat of Narkasur. It was Lord Krishan who killed Narkasur and freed the prisoners. On this day, the people of get up before sunrise and prepare duplicate blood with kumkum and haldi. A bitter fruit is taken to symbolize the demon. This fruit is squashed with their feet, and they apply the duplicate blood on their forehead with a feeling of triumph. Then as per ritual they bathe with oil and apply sandalwood tilak on their forehead. After pooja in mandirs, families feast on fruits and sweets.

 

South India – According to Hindu Purans, King Bali was a generous demon king. He was powerful enough to become a threat for the Gods of heaven. To reduce Bali's power Lord Vishnu came in the form of a dwarf brahmin. The Brahmin cleverly asked Bali for land enough to keep three steps of his foot. The king gave it to him happily. Lord Vishnu then manifested himself in his true form which was immensely huge.

 

He covered heaven by his first step and the entire earth with his second step. On realizing that he was facing Lord Vishnu, Bali submitted himself by offering his head to keep the third step. Lord Vishnu pushed him in hell with his foot. In exchange for this, to eradicate darkness from the world, Lord Vishnu presented him the diya of enlightenment. He also blessed Bali to come back to his people once every year to light lakhs of diyas from his diya so that the dark night of Diwali is eradicated from ignorance, greed, envy, desire, anger, ego and laziness, and so that the light of enlightenment, good judgement and friendship fills the night. Even today on the day of Diwali, one diya is lighted from the other. And without the wind blowing, the stable flame of the diya gives us the message of peace and brotherhood.

दीपावली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

दीन-ए-इलाही के प्रवर्तक मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊंचे बॉस पर एक बड़ा आकाशदीप दीपावली के दिन लटकाया जाता था। बादशाह जहांगीर भी दीपावली धूमधाम से मनाते थे।

दीपावली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य हैं जो इतिहास के पन्नों में अपना विशेष स्थान बना चुके हैं। इस पर्व का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है, जिस कारण यह त्योहार किसी खास समूह का न होकर सम्पूर्ण राष्ट्र का हो गया है।

त्रेतायुग में भगवान राम जब रावण को हराकर अयोध्या वापस लौटे तब उनके आगमन पर दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया और खुशियाँ मनाई गई। यह भी कथा प्रचलित है कि जब श्रीकृष्ण ने आतताई नरकासुर जैसे दुष्ट का वध किया तब ब्रजवासियों ने अपनी प्रसन्नता दीपों को जलाकर प्रकट की। राक्षसों का वध करने के लिए माँ देवी ने महाकाली का रूप धारण किया। राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।

महाप्रतापी तथा दानवीर राजा बलि ने अपने बाहुबल से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली, तब बलि से भयभीत देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर प्रतापी राजा बलि से तीन पग पृथ्वी दान के रूप में माँगी। महाप्रतापी राजा बलि ने भगवान विष्णु की चालाकी को समझते हुए भी याचक को निराश नहीं किया और तीन पग पृथ्वी दान में दे दी। विष्णु ने तीन पग में तीनों लोकों को नाप लिया। राजा बलि की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दे दिया, साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि उनकी याद में भू लोकवासी प्रत्येक वर्ष दीपावली मनाएँगे।

कार्तिक अमावस्या के दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविन्दसिंहजी बादशाह जहाँगीर की कैद से मुक्त होकर अमृतसर वापस लौटे थे। 500 ईसा वर्ष पूर्व की मोहनजोदड़ो सभ्यता के प्राप्त अवशेषों में मिट्टी की एक मूर्ति के अनुसार उस समय मूर्ति में मातृ-देवी के दोनों ओर दीप जलते दिखाई देते हैं।

बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध के समर्थकों एवं अनुयायियों ने 2500 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध के स्वागत में हजारों-लाखों दीप जलाकर दीपावली मनाई थी।

सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक दीपावली के दिन हुआ था। इसलिए दीप जलाकर खुशियाँ मनाई गईं।

ईसा पूर्व चैथी शताब्दी में रचित कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मंदिरों और घाटों (नदी के किनारे) पर बड़े पैमाने पर दीप जलाए जाते थे। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीपावली के ही दिन शुरू हुआ था। जैन धर्म के चैबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया। महावीर-निर्वाण संवत् इसके दूसरे दिन से शुरू होता है। इसलिए अनेक प्रांतों में इसे वर्ष के आरंभ की शुरुआत मानते हैं। दीपोत्सव का वर्णन प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है। कल्पसूत्र में कहा गया है कि महावीर-निर्वाण के साथ जो अन्र्तज्योति सदा के लिए बुझ गई है, आओ हम उसकी क्षतिपूर्ति के लिए बर्हिज्योति के प्रतीक दीप जलाएँ।

पंजाब में जन्मे स्वामी रामतीर्थ का जन्म व महाप्रयाण दोनों दीपावली के दिन ही हुआ। इन्होंने दीपावली के दिन गंगातट पर स्नान करते समय ‘ओम’ कहते हुए समाधि ले ली। महर्षि दयानन्द ने भारतीय संस्कृति के महान जननायक बनकर दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया। इन्होंने आर्य समाज की स्थापना की।

दीन-ए-इलाही के प्रवर्तक मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊँचे बाँस पर एक बड़ा आकाशदीप दीपावली के दिन लटकाया जाता था। बादशाह जहाँगीर भी दीपावली धूमधाम से मनाते थे।

मुगल वंश के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर दीपावली को त्योहार के रूप में मनाते थे और इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेते थे। शाह आलम द्वितीय के समय में समूचे शाही महल को दीपों से सजाया जाता था एवं लाल किले में आयोजित कार्यक्रमों में हिन्दू-मुसलमान दोनों भाग लेते थे।

अष्ट लक्ष्मी मंत्र

ॐ आद्यलक्ष्म्यै नमरू

ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमरू

ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नमरू

ॐ अमृतलक्ष्म्यै नमरू

ॐ कामलक्ष्म्यै नमरू

ॐ सत्यलक्ष्म्यै नमरू

ॐ भोगलक्ष्म्यै नमरू

ॐ योगलक्ष्म्यै नमरू

क्षमा प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ॥

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।

यत्पूजितं मया देवि परिपूर्ण तदस्तु मे ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वम् मम देवदेव ।

पापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः ।

त्राहि माम् परमेशानि सर्वपापहरा भव ॥

अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ऊँ महालक्ष्म्यै विद्महे।

विष्णुप्रियायै धीमहि।

दीपावली के लिए धन प्राप्ति के 4 अचूक मंत्र

 धन की देवी श्रीलक्ष्मी को प्रसन्न कर प्राप्त करने के अचूक 4 मंत्र।

1. कमल गट्टे की माला से गुलाबी आसन तथा महालक्ष्मी यंत्र के सामने उत्तराभिमुख हों। लक्ष्मीजी के सुंदर चित्र के सामने निम्न मंत्र का चार लाख बार जाप करें।

मंत्रः ”श्रीं क्लीं श्रीं।“

जप के बादः हवन में तिल, जौ, श्रीफल, बिल्बफल, कमल, कमलगट्टे, लाजा, गुगल, भोजपत्र, शक्कर, इत्यादि से हवन कर लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

2. किसी भी गुलाबी आसन पर उत्तराभिमुख हों बैठ जाएं। लक्ष्मीजी के सुंदर चित्र के सामने कमल गट्टे की माला से निम्न मंत्र का चार लाख बार जाप करें।

मंत्रः “ऐं हृीं श्री क्लीं।”

जप के बादः हवन में तिल, जौ, श्रीफल, बिल्बफल, कमल, कमलगट्टे, लाजा, गुगल, भोजपत्र, शक्कर, इत्यादि से हवन करें ।

3. गुलाबी आसन पर उत्तराभिमुख हों बैठ जाएं। कमलासन पर विराजमान लक्ष्मी माता के सामने कमल गट्टे की माला से निम्न मंत्र का सवा लाख बार जाप करें।

मंत्रः “ऊं कमलवासिन्यै स्वाहा।”

जप के बादः हवन में तिल, जौ, श्रीफल, बिल्बफल, कमल, कमलगट्टे, लाजा, गुगल, भोजपत्र, शक्कर, इत्यादि से हवन करें ।

4. गुलाबी आसन पर उत्तराभिमुख हों कमलासन पर विराजमान लक्ष्मी माता का सुंदर चित्र या श्रीयंत्र के सामने कमल गट्टे की माला से निम्न मंत्र का सवा लाख बार जाप करें।

मंत्रः “ऊं श्रीं हृीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।”

जप के बादः हवन में तिल, जौ, श्रीफल, बिल्वफल, कमल, कमलगट्टे, लाजा, गुगल, भोजपत्र, शक्कर, इत्यादि से हवन करें ।

दीपावली पर

विशेष शाबर मन्त्र…

शाबर मंत्रों को पढ़ने पर ऐसा कुछ विशेष प्रभाव अनुभव नहीं होता है, लेकिन मंत्रों का जप करने पर असाधारण सफलता प्राप्त होती है। कुछ मंत्र तो ऐसे हैं कि जिनको सिद्ध करने की जरूरत ही नहीं है, केवल कुछ समय उच्चारण करने से ही उसका प्रभाव दिखाई देने लगता है। यह मन्त्र धनतेरस या दीपावली की रात में करें …

विधिः- धूप-दीप-नैवेद्य से लक्ष्मी जी की पूजा कर सवा लक्ष जप करें। रुके कार्य पूरे होंगे और लक्ष्मी की कृपा बरसती रहेगी।

लक्ष्मी शाबर मन्त्र “विष्णु-प्रिया लक्ष्मी, शिव-प्रिया सती से प्रकट हुई। कामाक्षा भगवती आदि-शक्ति, युगल मूर्ति अपार, दोनों की प्रीति अमर, जाने संसार। दुहाई कामाक्षा की। आय बढ़ा व्यय घटा। दया कर माई।

ॐ नमःविष्णु-प्रियाय । नमः शिव-प्रियाय।

ॐ नमः कामाक्षाय। ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं फट् स्वाहा।

धन प्राप्ति मंत्रः इस मंत्र का जप दीपावली की रात्रि में किया जाता है। यह साधना 22 दिन की है और नित्य एक माला जप होना चाहिए। जो दिवाली पर ना कर सकें तो किसी भी शनिवार या रविवार से इस प्रयोग को शुरू किया जा सकता है। इसमें लाल वस्त्र पहने और पूजा में प्रयोग होने वाले सभी सामान को लाल रंग में रंग लेना चाहिए।

यदि दीपावली की रात्रि को इस मंत्र की 21 माला करे तो उसके व्यापार में उन्नति एवं आर्थिक सफलता प्राप्त होती है।

ॐ नमो पद्मावती पद्मनये लक्ष्मी दायिनी वांछाभूत प्रेत विंध्यवासिनी सर्व शत्रु संहारिणी दुर्जन मोहिनी ऋद्धि-सिद्धि वृद्धि कुरू कुरू स्वाहा। ॐ क्लीं श्रीं पद्मावत्यैं नमः।

सर्व कार्य सिद्ध मंत्रः हर प्रकार की सफलता एवं उन्नति के लिए इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है। दीपावली की रात्रि को 31 माला जप करने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। किसी भी प्रकार की माला का प्रयोग साधक कर सकता है ।

ऊॅ नमो महादेवी सर्वकार्य सिद्धकारिणी जो पाती पूरे

विष्णु महेश तीनों देवतन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरोमंत्र ईश्वरो वाचा। बिक्री बढ़ाने का मंत्र: व्यापार में बिक्री बढ़ाने का यह अद्भुत एवं अचूक मंत्र है। इसका प्रयोग 21 बार दिवाली को भी या किसी रविवार के दिन ही किया जाता है।

किसी भी रविवार को अपने हाथ में काले उड़द लेकर इस मंत्र का 21 बार जप करके उन उड़दों को व्यापार स्थल पर रात्रि के समय डाल दें और स्थान को बंद कर दें दूसरे दिन सफाई करके सारे उरद बहार कर दे ऐसा करने पर व्यापार में उन्नति होती है। भंवर वीर तूं चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा, उठे जो डंडी बिकै जो माल भंवर वीर सोखे नहीं जाये ।


प्रसन्न करने के अचूक उपाय

दीपावली पूजन कैसे करें, जिनसे माँ लक्ष्मी आपके भंडारे भर दें।

पूर्व दिशा में मुंह करके बैठ जाएं।

लाल, सफेद या पीले वस्त्र को पाटे पर बिछाकर उस पर हल्दी से स्वास्तिक बना दें। इस पर चावल और फूल की पंखुडियो को बिछाकर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाहिनी ओर स्थापित करें।

भगवान विष्णु की मूर्ति लक्ष्मी माता के बायीं ओर रखकर पूजा करनी चाहिएं। लक्ष्मी विष्णुप्रिया हैं। दीपावली पूजन के समय गणेश - लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की स्थापना अनिवार्य है।

दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर आपको मालामाल कर देंगी।

कलश में जल भर कर उसमे गंगाजल, चावल और सिक्का डाले। कलश को लक्ष्मीजी के पास चैकी के दायीं तरफ चावल पर रखें। आम के 5 अथवा 7 पत्ते मुह कलश के रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटे कि नारियल का आगे का भाग दिखाई दे और इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुणदेव का प्रतीक है।

एक घी और एक तेल का दीपक जलाएं।

दीपावली पूजन के समय मां लक्ष्मी को महिलाएं सुहाग सामग्री अर्पित करें। अगले दिन स्नान के बाद पूजा करके उस सामग्री को, मां लक्ष्मी के प्रसाद रूप में स्वयं ग्रहण कर,मां लक्ष्मी से घर में सदा रहने की प्रार्थना करें।

लक्ष्मी पूजा करते समय 11 कौडि़यां गंगाजल से धोऐ, और हल्दी कुमकुम लगाकर लक्ष्मी जी को चढ़ाए। अगले दिन लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्धि होगी।

कनकधारा स्तोत्रं, श्री विष्णु सहस्त्रनाम, श्री लक्ष्मी सूक्त, श्री सूक्त, अष्टलक्ष्मी मंत्र का पाठ करें

दियें में कपूर जलाएं ऐसा करने से दैहिक दैविक और भौतिक कष्ट से मुक्ति होती है।

घी की बत्ती से आरती करें।

लक्ष्मी पूजन के उपरांत घर में सभी कक्षों में शंख और डमरू बजाना चाहिए। ऐसा करने से अलक्ष्मी और दरिद्रता बाहर निकलती है और लक्ष्मी प्रवेश करती है।

पीले कपड़े में पांच लक्ष्मी कौड़ी और थोड़ी सी केसर, चांदी के सिक्के के साथ बांधकर धन स्थान पर रखें। कुछ ही दिनों में इसका प्रभाव दिखाई देने लगेगा।

हल्दी से रंगे हुए कपड़े के एक टुकड़े में एक मुट्ठी नाग केसर, एक मुट्ठी गेहूं , हल्दी की एक गांठ , तांबे का एक सिक्का, एक मुट्ठी साबुत नमक और तांबे की छोटी चरण पादुकाएं बांधकर रसोई घर में टांग दे | इससे मां लक्ष्मी जी के साथ मां अन्नपूर्णा की भी कृपा प्राप्त होती है तथा पारिवारिक कलह भी दूर होता है |

बरगद के 5 तथा अशोक वृक्ष के 3 पत्ते लाएं। बरगद के पत्तों पर हल्दी मिश्रित दही से स्वास्तिक चिह्न बनाएं तथा अशोक के पत्तों पर श्री लिखें। पूजा में इन पत्तों को रखें। पूजा के बाद इन्हें धन रखने के स्थान पर रख दें।

 

                                                             दीपावली में क्यों होती है

लक्ष्मी- गणेश की पूजा ?

 

  एक बार एक साधु के मन में राजसी सुख भोगने का विचार आया। यह सोचकर उसने लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या शुरू कर दी। लक्ष्मीजी प्रसन्न हुईं और उसे मनोवांछित वरदान दे दिया। वरदान को सफल करने के लिए वह साधु एक राजा के दरबार में पहुंचा और सीधा सिंहासन के पास पहुंचकर झटके से राजा का मुकुट नीचे गिरा दिया। यह देखकर राजा और सभासदों की भृकुटियां तन गई। किंतु तभी मुकुट में से एक विषैला सांप निकला। यह देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और सोचा कि इस साधु ने सांप से उसकी रक्षा की है इसलिए उसे अपना मंत्री बना लिया। एक बार साधु ने सभी को फौरन राजमहल से बाहर जाने को कहा। राजमहल में सभी उनके चमत्कार को नमस्कार करते थे। इसलिए सभी ने राजमहल खाली कर दिया। अगले ही पल वह धड़धड़ाता हुआ खंडहर बन गया | सभी ने उसकी प्रंशसा की । अब साधु के कहे अनुसार सभी काम होने लगे। यह सब देखकर साधु के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया और वह स्वयं के आगे सबको तुच्छ समझने लगा। एक दिन राजमहल के एक कक्ष में उसने गणेशजी की प्रतिमा देखी। उसने आदेश देकर वह मूर्ति वहां से हटवा दी। एक दिन दरबार में साधु ने राजा से कहा कि महाराज आप अपनी धोती तुरंत उतार दें, इसमें सांप है। राजा उनका चमत्कार पहले भी देख चुका था, इसलिए उसने धोती उतार दी। लेकिन उसमें सांप नहीं निकला। यह देख राजा को बहुत गुस्सा आया। उसने साधु को काल कोठरी में डलवा दिया। साधु फिर से तप करने लगा। स्वप्न में लक्ष्मी ने उससे कहा कि मूर्ख तूने राजमहल से गणेशजी की मूर्ति हटवा दी। वे बुद्धि के देवता हैं। तूने उन्हें रुष्ट कर दिया, इसलिए उन्होंने तेरी बुद्धि ले ली। साधु को अपनी गलती का पता चला। तब उसने गणपति को प्रसन्न किया। गणपति के प्रसन्न होते ही राजा कालकोठरी में गया और साधु से क्षमा मांग कर उसे फिर से मंत्री बना दिया। मंत्री बनते ही साधु ने गणपति को फिर से स्थापित किया। साथ ही वहां लक्ष्मी की मूर्ति भी स्थापित की। इस प्रकार कहा गया है कि धन के लिए बुद्धि का होना आवश्यक है। दोनों साथ होंगी तभी मनुष्य सुख एवं समृद्धि में रह सकता है। यही कारण है कि दिपावली पर लक्ष्मी एवं गणेश के रूप में धन एवं बुद्धि की पूजा होती है।

 

 

 

 

दीपावली पर माँ लक्ष्मी के आने का द्वार खोलते है भगवान् धन्वंतरी कहा जाता है की भगवान् धन्वंतरी को खुश किये बिना माँ लक्ष्मी की पूर्ण कृपा नहीं मिल सकती भगवान् धन्वंतरी और माँ लक्ष्मी का अटूट सम्बन्ध है | जिसका जिक्र हमारे पौराणिक ग्रंथो में भी है विष्णु पुराण में भी कहा गया है की समुद्र मंथन के वक्त जब भगवान् धन्वंतरी अमृत का कलश लेकर निकले थे तब माँ लक्ष्मी भी उनके साथ थी धन्वंतरी भगवान् को आयुर्वेद और चिकित्सा जगत का गुरु माना जाता है ये मान्यता है कि पीतल की धातु में भगवान् धन्वंतरी का अंश समाया रहता है | भगवान् धन्वंतरी को पीतल काफी प्रिय है इसलिए ज्योतिषी भी इस दिन पीतल खरीदने की सलाह देतें है | कई ज्योतिषियों का कहना है कि धनतेरस के दिन खरीदा गया पीतल जिस घर में रखा जाता है, उस घर के लोगो को रोगों और कष्टों से छुटकारा मिलता है, दरअसल भगवान् धन्वंतरी जिस अमृत कलश को लेकर समुद्र मंथन से निकले थे वो पीतल का था और तभी से पीतल में अमृत जैसे गुण माना जाता है | इसलिए घर को आरोग्य सौभाग्यपूर्ण बनाने के लिए पीतल खरीदना चाहिए धनतेरस के दिन चांदी खरीदना भी बेहद शुभ माना गया है पंडितों का कहना है कि धनतेरस पर चांदी खरीदने से यश और समृद्धि बढ़ती है |
दीवाली के रात का सबसे बड़ा मंत्र

 

लक्ष्मी पूजा का स्थान आग्नेय कोंण

मत्स्य पुराण के अनुसार अनेक दीपको से लक्ष्मी जी की आरती करने को दीपावली कहतें हैं | धन वैभव और सौभाग्य प्राप्ति के लिए दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ट माना गया है|
श्री महालक्ष्मी पूजन - मंत्रजाप, तंत्रादि साधन के लिए समय सुबह मिलेगा हर काल के बाद वक्त का महत्व अलग - अलग रखतें हैं| पूजा के लिए पूजास्थल तैयार करतें समय दिशाओं का भी उचित समन्वय रखना ज़रूरी है |
दिशा :- पूजा का स्थान आग्नेय पूर्व दिशा की ओर बनाना शुभ है इस दिशा के स्वामी भगवान शिव हैं, जो ज्ञान एवं विद्या के अधिष्ठाता हैं | पूजा स्थल पूर्व या उत्तर दिशा की ओर भी बनाया जा सकता है |
रंग :- पूजा स्थल को सफेद या हल्के पीले रंग से रंगें | माता के नीचे लाल वस्त्र ही बिछाएँ, ये रंग शांति पवित्रता और आध्यात्मिक प्रगति के प्रतीक हैं |
मूर्तियाँ :- देवी - देवताओं की मूर्तियाँ तथा चित्र पूर्व - उत्तर दीवार पर इस प्रकार रखें कि उनका मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की तरफ रहे |
कलश :- पूजा कलश पूर्व दिशा मे उत्तरी छोर के समीप रखा जाए |
हवनकुंड :- हवनकुंड या


दीपावली पूजा के मुहूर्त एवं उपाय

दीपावली पूजा का पहला मुहूर्त :-
दीपावली पूजा का दूसरा मुहूर्त :-
दीपावली पूजा का तीसरा मुहूर्त (महा निशीथ काल ) :-
श्री महालक्ष्मी पूजन, मन्त्रजाप, पाठ साधन के लिए प्रदोष, निशीथ, महानिशीथ काल व साधनाकाल अनुष्ठानुसार अलग - अलग महत्त्व रखतें हैं |
महानिशीथ काल :-
अमृत चौघडिया :-
स्थिर लग्न सिंह :-


चंद्रमा का होरा काल :-

कुछ लोग परम्परागत प्रदोष बेला के मुताबिक़ भी पूजा करतें है देखतें हैं क्या है प्रदोष बेला ....
परम्परागत प्रदोष बेला -
शुभ चौघडिया :-

शुक्र और बुध का होरा काल भी है किन्तु ग्रहों की स्थतियाँ अनुकूल नहीं हैं |
दिशा -
पूजा का स्थान आग्नेय की ओर बनाना शुभ है इस दिशा के स्वामी भगवान शिव हैं, जो ज्ञान एवं विद्या के अधिष्ठता हैं ...
पूजा स्थल पूर्व या उत्तर - पूर्व दिशा की ओर भी बनाया जा सकता है |
रंग -
पूजा स्थल को सफ़ेद या हल्के पीले रंग से रंगें .... माता की मूर्ती के नीचे लाल वस्त्र ही बिछाएं ... ये रंग शान्ति, पवित्रता और आध्यात्मिक प्रगति के प्रतीक हैं |
मूर्तियाँ -
देवी - देवताओं की मूर्तियाँ तथा चित्र पूर्व उत्तर दिशा दीवार पर इस प्रकार रखें कि उनका मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की तरफ रहें ......

कलश -
पूजा कलश पूर्व दिशा में उत्तरी छोर के समीप रखा जाए .....

हवनकुंड या यज्ञवेदी का स्थान पूजास्थल के आग्नेय कोण की ओर ही रखना चाहिए ......
दीप -
लक्ष्मी जी की पूजा के दीपक उत्तर दिशा और आग्नेय कोण की ओर रखें जाते हैं ....
बैठना -
पूजा, साधना आदि के लिए उत्तर या उत्तर - पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना उत्तम है |
शंख -
दीपावली में दक्षिणवर्ती शंख का विशेष महत्त्व है इस शंख को विजय, शुख - समृद्धि व लक्ष्मी जी का साक्षात माना गया है ...... दक्षिणवर्ती शंख को पूजा में इस प्रकार रखें कि इसकी पूँछ आपकी ओर रहे |
यंत्र -
श्रीयंत्र लक्ष्मी जी का प्रिय है | इसकी स्थापना उत्तर - पूर्व दिशा में करनी चाहिए .... |
मन्त्र -
लक्ष्मी जी के मन्त्रों का जाप स्फटिक व कमलगट्टे कि माला से किया जाता है | इसका स्थान पूजा स्थल के उत्तर कि ओर होना चाहिए श्री आद्यशंकराचार्य द्वारा विचरित ' श्री कनकधारा स्रोत ' शुभ होता है | दीपावली के दिन श्री लक्ष्मी पूजन के पश्चात श्री कनकधारा स्रोत का पाठ किया जाये तो घर कि नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाने से शुख - समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है |

लक्ष्मी पूजन में राशिनुसार आसन का प्रयोग –

मेष :- हल्के गुलाबी या मौसमी रंग के आसन का प्रयोग करें |
वृष :- पीले रंग के आसन का प्रयोग करें, आग्नेय दिशा ( दक्षिण पूर्व ) के स्वामी भगवान शिव हैं|
पूजास्थल पूर्व या उत्तर - पूर्व दिशा कि ओर भी बनाया जा सकता है |
मिथुन :- सफ़ेद या सैफ्रान रंग के आसन का प्रयोग करें |
कर्क :-   सफ़ेद चमकीले रंग के रेशमी आसन का प्रयोग लक्ष्मी पूजन में करें |
सिंह :-     फिरोजी रंग के आसन का प्रयोग करें |
कन्या :-    आसमानी रंग के आसन का प्रयोग करें |
तुला :-     सफ़ेद ऊन के आसन का प्रयोग करें |
वृश्चिक :-  लाल ऊन के आसन पर बैठकर लक्ष्मी पूजन करें |
धनु :-      चमकीले सफ़ेद रंग के आसन का प्रयोग करें |
मकर :-    हरे रंग के आसन का प्रयोग करें |
कुंभ :-     हल्के हरे या पिस्ता ग्रीन रंग के आसन का प्रयोग करें |
मीन :-    लाल रंग के रेशमी आसन का प्रयोग करें |

लक्ष्मी पाने का आखिरी दिन –

आज आपके बच्चे डाक्टर बनेगें पढ़ाई मे सफलता पाने का नुक्सा सालभर खुश रहने का उपाय
कैसे मिले अच्छी सेहत ?
कैसे बचे बुरी नज़र से ?
बुरी नज़र से बचने के उपाय -
गाय के गोबर का छोटा सा पहाड़ बनाएँ बीचोबीच मे एक दीयाली की जगह बनाए| मिट्टी का एक दीपक जलाएँ पहाड़ के उपर सींके घुसा दें |
कैसे रहें सेहतमंद -
पीपल, गूलर, नींम, आम और बरगद की छाल को पानी मे उबाल लें, उबले हुए पानी से स्नान करें |
बच्चों के कल्याण के उपाय -
चावल के आटें से तीन चिड़ियाँ बनाएँ |उन्हें पानी मे उबाल लें, एक चिड़िया गाय को खिलाएँ दूसरी चिड़िया छत पर डाल दें | तीसरी चिड़िया लक्ष्मी गणेश को समर्पित कर दें |
कैसे हो हर मनोकामना पूरी -
बरगद की पेड़ की छाल लें, इसे कूटकर पीपल के पाँच पत्तो पर रखें अपनी इच्छाएँ व्यक्त करें, आम नींम और गूलर की तीन दण्डियाँ उसपर रख दें उसके आगे कपूर और ६ लौंग एक कटोरी मे रखकर जला दें |

On this day it is recommended for brothers to visit their sisters and have lunch at her place this adds to luck & prosperity of her brother, and the brother should give gifts, which he can best afford.
This day marks the beautiful and strong bonding between a brother and sister. 

Poojit Ganesh Laxmi

For those of you who would like to buy pranpatishtith Ganesh Laxmi , can place their orders now.You can place your orders through phone or through email.

9971000226 

Share this post

Submit Diwali  in Delicious Submit Diwali  in Digg Submit Diwali  in FaceBook Submit Diwali  in Google Bookmarks Submit Diwali  in Stumbleupon Submit Diwali  in Technorati Submit Diwali  in Twitter