Rahukaal Today/ 09 OCTOBER 2017 (Delhi)-15 OCTOBER 2017

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अक्षय नवमी
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अक्षय नवमी

यदि आप अक्षय पुण्य प्रप्ति की कामना रखते है, जीवन में गगनचुम्बी सफलता हासिल कर लेना चाहते है और विजयी भव का वरदान भी एक ही झटके में पा लेना चाहते है तो अक्षय नवमी के दिन आवले के वृक्ष की पूजा करके उस के सानिध्य में भोजन करना न भूलें

 


प्रकृति से हमें तरह-तरह की वनस्पतियां मिली हैं और हर वनस्पति का अपना अलग गुण धर्म है। हमारा षरीर भी पंचतत्वों से र्निमित है और प्रति क्षण हम जो सांस ले रहे है। उसमें इन वनस्पतियों के तत्व समाहित हैं जो हमारे अच्छे स्वास्थ के लिये जरुरी भी है। अक्षय नवमी के दिन आवले के वृक्ष की पूजा अर्चना करना व जल चढाना हल्दी अक्षत रोली अर्पित करना और धागों को वृक्ष के चारों ओर लपेटना और वृक्ष के निचे बैठ कर भोजन करना यह सभी प्रक्रिया रंग चिकित्सा, सूर्य की किरणों के अपरर्वतन की प्रक्रिया के साथ आवले के अपने जो विषिश्ट गुण धर्म है सभी का एक सुन्दर कौम्बिनेशन हमारे शरीर में महत्वपूर्ण हलचल उत्पन्न करके हमें ऊर्जा प्रदान करता है, साथ ही हमारे षरीर में जो कैमिकल रियेक्षन होते है वो हमे अदम्य साहस और उत्साह प्रदान करते है

इस दिन भगवान विष्णु के पूजन का विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास की नवमी तिथि को या कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु  ने आवंले के पेड़ पर निवास किया था ।ऐसी मान्यता है कि आज के दिन द्वापर युग की शुरुआत हुई थी। यह  दिन भगवान विष्णु के पूजन का भी  दिन कहा जाता है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कंस-वध से पहले तीन वन की परिक्रमा करके क्रांति का शंखनाद किया था। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए लोग आज भी अक्षय नवमी पर असत्य के विरुद्ध सत्य की जीत के लिए मथुरा-धार व वृंदावन की परिक्रमा करते हैं। पुराणों में अक्षय नवमी को लेकर कई कथाएं हैं। नवमी के दिन आंवला को भोजन में सम्मलित करना व आंवले के वृक्ष का पूजन करने का महत्व है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना करने से अक्षय पुण्य, सुख एवं पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करने से मनोकामनाएं पूरी होती है। कार्तिक शुक्ल नवमी अक्षय नवमी भी कहलाती है। इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्न आदि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वनस्पति विज्ञानी भी मानते हैं कि आंवला अत्यधिक पौष्टिक होता है। इसमें औषधीय गुण होते हैं। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी है। औषधीय गुणों वाले पेड़ों व वनस्पतियों के संरक्षण का संदेश हमें इस पर्व से मिलता है, जो हमारे स्वस्थ जीवन के प्रति हमें जगरूप भी करता है।

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Akshay Navami

Nature bestows us with varied varieties of plants . Each plant is equipped with its unique characterstics. Our body is also made up of panchtatva and every second the air that we breathe includes the effect of all these vegetations. These plants are highly essential for our well-being. On the day of Akshay Navami, we should rever the tree of Indian Gooseberry and offer jal, turmeric and roli . Furthermore, we should wind the stem of the tree with the sacred thread and sit under its shade to take meals. All these procedures bestow us with the benefits of colour-therapy. When sunrays falls on earth, they react with the rays of gooseberry plant and generates a special effect that people revering tree can experience. The beautiful combination of all this together leaves a healthy and positive effect and creates a vibration in our body. These vibrations also affect all the chakras of our body. The chemical reaction originated as a result  sanctifies us with loads of enthusiasm and courage.

We should rever God Vishnu on this day. According to the mythological beliefs, on the day of Kartik month's Navami or from Kartik Shukla paksh Navami till Purnima, Lord Vishnu made his dwelling on the  tree of Indian Gooseberry plant. It is also believed that on this day, Dwapar Yuga started. This day is also important to rever Lord Vishnu. Three days before this day,  Lord Krishna did a shankh-naad  and performed three parikramas around the forest and announced for the death of Kansa. Following this ritual, people of Vrindavan and Mathura also do a parikrama hoping that truth will always conquer the lies. In our vedic scriptures, there are plenty of stories regarding Akshay Navami. On this day, one should include Indian Gooseberry in his diet and rever the plant.If one make donations to the poor, he gets blessed with  happiness and the birth of a baby boy. In contrast to any other day, if you make any donations on Akshay Navami, the auspiciousness accrued is multi-fold times. All the wishes get fulfilled if one takes his meal under the tree. Kartika Shukla Navami is also known as Akshay Navami. After taking shower, if one performs the pooja, tarpan and donate grains, its significance multiplies many times. Scientists working in this sphere believe that Gooseberry tree is highly beneficial for health. It has loads of medicinal properties. It consecrates our body with miraculous benefits. The day also sends us the message of protecting the vegetations that are endowed with remarkable medicinal values. For a prosperous and healthy life, we should celebrate Akshay Navami as a festival and protect such vegetations.

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