Rahukaal Today/ 09 AUGUST 2017 (Delhi)-15 AUGUST 2017

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30 मई, हिंदी पत्रकारिता दिवस
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हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत

 

आज दिवस लौं उग चुक्यौ मार्तण्ड उदन्त, अस्ताचल को जात है दिनकर दिन अब अन्त।

 

 30 मई, 1826 ई. का दिन हिंदी समाचार पत्रों की शुरुआत का दिन है । इस दिन कानपुर निवासी पंडित युगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से प्रथम हिन्दी समाचार पत्र ”उदन्त मार्तण्ड“ का प्रकाशन आरंभ किया था । कलकता के कोलू टोला नामक मोहल्ले की 37 नंबर आमड़तल्ला गली से यह हिंदी साप्ताहिक पत्र निकाला गया था और इतिहास की इसी तारीख को आज हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है । ‘उदन्त मार्तण्ड’ नाम उस समय की सामाजिक परिस्थितियों का संकेतक था, जिसका अर्थ है- ‘समाचार सूर्य’। जिस प्रकार सूर्य अपने तेज से चारों ओर रोशनी फैलाता है, उसी प्रकार यह समाचार पत्र भी उस समय अंग्रेजों के खिलाफ जनसामान्य की आवाज उठाने के लिये शुरू हुआ था । ऊपर दी गई पंक्तियां इसके अर्थ को समझाने के लिये बहुत ही उपयुक्त हैं । उस दौरान अंग्रेजी, फारसी और बांग्ला में तो कई समाचार पत्र निकल रहे थे, लेकिन हिंदी भाषा में एक भी पत्र नहीं था । इसलिए हिंदी भाषियों की आवाज उठाने के लिये इस समाचार पत्र का आरंभ किया गया था । हालांकि बाद में पैसे के अभाव में पंडित युगल किशोर शुक्ल को इसे बंद करना पड़ा । 1826 से अब तक 190 वर्षों के दौरान हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी तेजी आई है । आज के समय में तो हिंदी समाचार पत्रों ने पूरे देश में अपनी पैठ जमा रखी है । वहीं जहां उस समय शुरुआत में केवल समाचार पत्र थे, लेकिन अब समाचार पत्रों के अलावा एक पूरा हिंदी मीडिया हमारे सामने खड़ा है । नब्बे के दशक के बाद से समाचार पत्र और बहुत सी पत्रिकाएं एक बहुत बड़े व्यवसाय के रूप में उभर चुकी हैं । विभिन्न राज्यों से कई हिंदी समाचार पत्र व पत्रिकाओं के संस्करण निकल रहे हैं और देश-दुनिया की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति से लोगों को अवगत करा रहे हैं । धार्मिक पत्रिकाओं में से एक प्रमुख नाम ‘ज्ञान वाणी’ पत्रिका का भी है जो पिछले छः सालों से अनवृत्त रूप से अपने पाठकों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर धर्म से आधारित मुद्दों पर अवगत करा रही है ।

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