Rahukaal Today/ 15 June 2017 (Delhi)-21 June 2017

  • Mon
  • Tue
  • Wed
  • Thu
  • Fri
  • Sat
  • Sun
Rahukaal Today
10:34:15 - 12:17:00

8:31:22 - 9:51:45
Rahukaal Today
8:51:00 - 10:34:00

7:14:52 - 8:58:45
Rahukaal Today
17:26:52 - 19:10:00

12:19:30 - 13:57:22
Rahukaal Today
7:10:15 - 8:52:30

13:57:37 - 15:35:45
Rahukaal Today
15:42:00 - 17:24:30

10:42:30 - 12:15:00
Rahukaal Today
12:17:00 - 13:59:30

9:10:30 - 10:42:45
Rahukaal Today
13:59:45 - 15:42:30

16:50:00 - 18:22:00
28 मई, रम्भा तृतीया
There are no translations available.

अप्सरा साधना

हर किसी के मन में यह बात जरूर आती होगी कि काश, मैं अपने व्यक्तित्व से जिसको चाहूं उसको आपनी तरफ सम्मोहित कर सकूं लेकिन फिर भी आप इसमे विफल रहते हैं, तो आप रम्भा तृतीय के दिन व्रत कर देवी रम्भा की साधना कर अपने अन्दर वो आकर्षण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आप कभी भी कहीं भी किसी को भी पल भर में अपनी तरफ आकर्षित कर लेंगे...


रम्भा तृतीया व्रत ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन रखने का विधान है । इसे रम्भा तीज के नाम से भी जाता है । हिन्दू मान्यतानुसार सागर मंथन से उत्पन्न हुए 14 रत्नों में से एक रम्भा थी । कहा जाता है कि रम्भा बेहद सुंदर थी । रम्भा तृतीय के दिन कई साधक रम्भा के नाम से साधना कर सम्मोहनी शक्तियां प्राप्त करते हैं । रम्भा अप्सरा की सिद्धि प्राप्त करने पर, रम्भा साधक के जीवन में एक छाया के रूप में सदैव साथ रहती हैं और वह साधक की सभी मनोकामनायें जल्द ही पूरी कर देती हैं । फलस्वरूप साधक का जीवन प्यार और खुशियों से भर जाता है । रम्भा अप्सरा साधना 9 दिन की होती है जो रात में की जानी चाहिए । यह साधना पूर्णिमा, अमावस्या या शुक्रवार को शुरू की जा सकती हैं, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को करने से ये विशेष फल प्रदान करती है यानी सिद्धि की संभावना बढ़ जाती है । तृतीया तिथि से जोड़कर साधना करने के लिए अमावस्या से नौ दिन पहले यानी ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी से साधना शुरू करनी चाहिए और अमावस्या के बाद तीन दिन केवल देवी का ध्यान करना चाहिए । साधना करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ सुन्दर कपडे़ पहन कर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पीले रंग के आसन पर बैठ जायें । दो माला पुष्पों की रखें । अगरबत्ती और एक घी का दीपक जलाएं । सामने एक खाली धातु की कटोरी रखें । फिर दोनों हाथों में गुलाब की पंखुड़ियां लें और इस प्रकार पूजा करें । तत्पश्चात ध्यान करते हुए 108 बार- "ह्रीं रम्भे आगच्छ आगच्छ" मंत्र का आह्वान करें, आह्वान के बाद 11 माला "ह्रीं ह्रीं रं रम्भे आगच्छ आज्ञां पालय पालय मनोवांछितं देहि रं ह्रीं ह्रीं" मंत्र का जाप करें । जप के दौरान अपने ध्यान को विलासपूर्वक रम्भा के रूप में लगाये रखना चाहिए । पूजा स्थल को सुगंधित रखना चाहिए और अपने विचारों और चेष्टाओं में विलास का पुट रखना चाहिए । पूजा के बाद देवी का स्मरण कर उससे सदैव अपने साथ रहने का अनुरोध करना चाहिए । इस प्रकार नौ दिन तक लगातार उपासना करनी चाहिए । चैथे दिन से कुछ अनुभव होने लगते हैं और नौवें दिन साक्षात्कार का अनुभव होता है । अपना अनुभव किसी से शेयर नहीं करना चाहिए ।

रम्भा तृतीया के दिन विवाहित स्त्रियां गेहूं, अनाज और फूल से लक्ष्मी जी और चूड़ियों के जोड़े की भी पूजा करती हैं जिसे अपसरा रम्भा और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है । कई जगह इस दिन माता सती की भी पूजा की जाती है । हिन्दू पुराणों के अनुसार इस व्रत को रखने से स्त्रियों का सुहाग बना रहता है । अविवाहित लड़कियां इस व्रत को अच्छे वर की कामना से इस व्रत को करती हैं । रम्भा तृतीया का व्रत शीघ्र फलदायी माना जाता है ।

Share this post

Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in Delicious Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in Digg Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in FaceBook Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in Google Bookmarks Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in Stumbleupon Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in Technorati Submit 28 मई, रम्भा तृतीया in Twitter