Rahukaal Today/ 09 AUGUST 2017 (Delhi)-15 AUGUST 2017

  • Mon
  • Tue
  • Wed
  • Thu
  • Fri
  • Sat
  • Sun
Rahukaal Today
7:28:07 - 9:07:15

8:31:22 - 9:51:45
Rahukaal Today
15:43:00 - 17:22:00

7:14:52 - 8:58:45
Rahukaal Today
12:26:00 - 14:06:00

12:19:30 - 13:57:22
Rahukaal Today
14:05:22 - 15:45:15

13:57:37 - 15:35:45
Rahukaal Today
10:46:15 - 12:26:00

10:42:30 - 12:15:00
Rahukaal Today
9:06:15 - 10:45:52

9:10:30 - 10:42:45
Rahukaal Today
17:23:37 - 19:03:00

16:50:00 - 18:22:00
25 मई 2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत
There are no translations available.

वट सावित्री व्रत संवत 2074 ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या

 

जानिये वट सावित्री व्रत कथा व पूजा विधि

वट सावित्री व्रत एक ऐसा व्रत जिसमें हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र और संतान प्राप्ति की कामना करती हैं । उत्तर भारत में तो यह व्रत काफी लोकप्रिय है । इस व्रत की तिथि को लेकर पौराणिक ग्रंथों में भी भिन्न-भिन्न मत मिलते है । दरअसल इस व्रत को ज्येष्ठ माह की अमावस्या और इसी मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है । एक और जहां निर्णयामृत के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को किया जाता है तो वहीं स्कंद पुराण एवं भविष्योत्तर पुराण इसे ज्येषठ पूर्णिमा पर करने का निर्देश देते हैं । वट सावित्री पूर्णिमा व्रत दक्षिण भारत में किया जाता है, वहीं वट सावित्री अमावस्या व्रत उत्तर भारत में विशेष रूप से किया जाता है । आइये जानते हैं क्या है वट सावित्रि व्रत की कथा और क्या है इस पर्व का महत्व ? 

 

वट सावित्रि व्रत कथा

 वट सावित्रि व्रत की यह कथा सत्यवान-सावित्रि के नाम से उत्तर भारत में विशेष रूप से प्रचलित हैं । कथा के अनुसार एक समय की बात है कि मद्रदेश में अश्वपति नाम के धर्मात्मा राजा का राज था ।उनकी कोई भी संतान नहीं थी । राजा ने संतान हेतु यज्ञ करवाया । कुछ समय बाद उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने सावित्री रखा । विवाह योग्य होने पर सावित्री के लिए द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पतिरूप में वरण किया । सत्यवान वैसे तो राजा का पुत्र था लेकिन उनका राज-पाट छिन गया था और अब वह बहुत ही द्ररिद्रता का जीवन जी रहे थे । उसके माता-पिता की भी आंखो की रोशनी चली गई थी । सत्यवान जंगल से लकड़ियां काटकर लाता और उन्हें बेचकर जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहा था । जब सावित्रि और सत्यवान के विवाह की बात चली तो नारद मुनि ने सावित्रि के पिता राजा अश्वपति को बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के एक वर्ष बाद ही उनकी मृत्यु हो जाएगी । हालांकि राजा अश्वपति सत्यवान की गरीबी को देखकर पहले ही चिंतित थे और सावित्रि को समझाने की कोशिश में लगे थे । नारद की बात ने उन्हें और चिंता में डाल दिया लेकिन सावित्रि ने एक न सुनी और अपने निर्णय पर अडिग रही । अंततः सावित्री और सत्यवान का विवाह हो गया ।सावित्री सास-ससुर और पति की सेवा में लगी रही । नारद मुनि ने सत्यवान की मृत्यु का जो दिन बताया था, उसी दिन सावित्री भी सत्यवान के साथ वन को चली गई । वन में सत्यवान लकड़ी काटने के लिए जैसे ही पेड़ पर चढ़ने लगा, उसके सिर में असहनीय पीड़ा होने लगी और वह सावित्री की गोद में सिर रखकर लेट गया । कुछ देर बाद उनके समक्ष अनेक दूतों के साथ स्वयं यमराज खड़े हुए थे ।जब यमराज सत्यवान के जीवात्मा को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चलने लगे, पतिव्रता सावित्री भी उनके पीछे चलने लगी । आगे जाकर यमराज ने सावित्री से कहा, ‘हे पतिव्रता नारी ! जहां तक मनुष्य साथ दे सकता है, तुमने अपने पति का साथ दे दिया । अब तुम लौट जाओ ।’ इस पर सावित्री ने कहा, ‘जहां तक मेरे पति जाएंगे, वहां तक मुझे जाना चाहिए । यही सनातन सत्य है ।’ यमराज सावित्री की वाणी सुनकर प्रसन्न हुए और उसे वर मांगने को कहा । सावित्री ने कहा, ‘मेरे सास-ससुर अंधे हैं, उन्हें नेत्र-ज्योति दें ।’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर उसे लौट जाने को कहा और आगे बढ़ने लगे । किंतु सावित्री यम के पीछे ही चलती रही । यमराज ने प्रसन्न होकर पुन: वर मांगने को कहा । सावित्री ने वर मांगा, ‘मेरे ससुर का खोया हुआ राज्य उन्हें वापस मिल जाए ।’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर पुनः उसे लौट जाने को कहा, परंतु सावित्री अपनी बात पर अटल रही और वापस नहीं गयी । सावित्री की पति भक्ति देखकर यमराज पिघल गए और उन्होंने सावित्री से एक और वर मांगने के लिए कहा । तब सावित्री ने वर मांगा, ‘मैं सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनना चाहती हूं । कृपा कर आप मुझे यह वरदान दें ।’ सावित्री की पति-भक्ति से प्रसन्न हो इस अंतिम वरदान को देते हुए यमराज ने सत्यवान की जीवात्मा को पाश से मुक्त कर दिया और अदृश्य हो गए । सावित्री जब उसी वट वृक्ष के पास आई तो उसने पाया कि वट वृक्ष के नीचे पड़े सत्यवान के मृत शरीर में जीव का संचार हो रहा है । कुछ देर में सत्यवान उठकर बैठ गया । उधर सत्यवान के माता-पिता की आंखें भी ठीक हो गईं और उनका खोया हुआ राज्य भी वापस मिल गया । 

 

वट सावित्रि व्रत का महत्व

जैसा कि इसकी कथा से ही ज्ञात होता है कि यह पर्व हर परिस्थिति में अपने जीवनसाथी का साथ देने का संदेश देता है । इससे ज्ञात होता है कि पतिव्रता स्त्री में इतनी ताकत होती है कि वह यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ला सकती है । वहीं सास-ससुर की सेवा और पत्नी धर्म की सीख भी इस पर्व से मिलती है । मान्यता है कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और उन्नति और संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत रखती हैं ।

 

वट सावित्रि व्रत पूजा विधि

 वट सावित्रि व्रत में वट यानि बरगद के वृक्ष के साथ-साथ सत्यवान-सावित्रि और यमराज की पूजा की जाती है । माना जाता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव वास करते हैं । अतः वट वृक्ष के समक्ष बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन स्त्रियों को प्रातःकाल उठकर स्नान करना चाहिये । इसके बाद रेत से भरी एक बांस की टोकरी लें और उसमें ब्रहमदेव की मूर्ति के साथ सावित्री की मूर्ति स्थापित करें । इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियाँ स्थापित करे । दोनों टोकरियों को वट के वृक्ष के नीचे रखे और ब्रहमदेव और सावित्री की मूर्तियों की पूजा करें । तत्पश्चात सत्यवान और सावित्री की मूर्तियों की पूजा करे और वट वृक्ष को जल दे । वट-वृक्ष की पूजा हेतु जल, फूल, रोली-मौली, कच्चा सूत, भीगा चना, गुड़ इत्यादि चढ़ाएं और जलाभिषेक करे । वट वृक्ष के तने के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर तीन बार परिक्रमा करे । इसके बाद स्त्रियों को वट सावित्री व्रत की कथा सुननी चाहिए । कथा सुनने के बाद भीगे हुए चने का प्रसाद निकाले और उसपर कुछ रूपए रखकर अपनी सास को दे । जो स्त्रियाँ अपनी सासों से दूर रहती है, वे प्रसाद उन्हें भेज दे और उनका आशीर्वाद ले । पूजा समापन के पश्चात ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि दान करें ।

 

Share this post

Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in Delicious Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in Digg Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in FaceBook Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in Google Bookmarks Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in Stumbleupon Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in Technorati Submit 25 मई  2017 गुरुवार, वट सावित्री व्रत in Twitter