Rahukaal Today/ 17 January 2017 (Delhi)-23 January 2017

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24 जनवरी 2017, बुध प्रदोष व्रत
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बढ़ेगा व्यापार

प्रत्येक मास की दोनों त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव के निमित्त प्रदोष व्रत रक्खा जाता है। इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, सुगंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, और इलायची चढ़ाएं। शाम के समय पुनः शिवजी की षोडशोपचार पूजा करें। घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। शिव आरती व शिव स्त्रोत, मंत्र जाप करें और रात्रि जागरण करें।

कर्ज मुक्ति के राशिनुसार उपाय

मेष- शहद खा कर स्नान करें, बुआ से आशीर्वाद लें। ऊँ ऋणहत्रे नमः का 108 बार जाप करें।

वृष- दूध, गंगाजल पानी में मिला कर स्नान करें, पत्नी को खुश रखें। ऊँ गुरुवे नमः का 108 बार जाप करें।

मिथुन- गुलाब का फूल गुलाब जल में मिलाकर स्नान करें। गुड़ का दान करें। ऊँ मंगलाय नमः का जाप 108 बार करें।

कर्क- पीली सरसों जल में डालकर नहायें, चने की दाल दान करें।

सिंह- काले तिल पानी में मिलाकर नहायें, साबूत उरद दान करें।

कन्या- सौंफ पानी में मिलाकर नहायें, कुल्थि की दाल दान करें।

तुला- पीले पुष्प पानी में डाल कर नहायें, पीले चावल दान करें।

वृश्चिक- हींग पानी में मिला कर नहायें, लाल मसूर की दाल दान करें। ऊँ वामदेवाय नमः का 108बार जाप करें।

धनु- दही पानी में मिला कर नहायें, सबूत चावल दान करें।

मकर- हरी इलायची पानी में मिला कर नहायें, सबूत मूंग की दाल दान दें। ऊँ सुरपूजिताय नमः का 108 बार जाप करें।

कुंभ- गंगा जल पानी में मिला कर नहायें, चीनी दान करें।

मीन- केसर पानी में मिला कर नहायें, गेहूं दान करें।

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अजात शत्रु 

10 जनवरी 2017, भौम प्रदोष व्रत 

शास्त्रों के अनुसार जब प्रदोष मंगलवार के दिन होता है तो उसे भौम प्रदोष कहा जाता है। इस व्रत को रखने से गोदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और शिव कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। साधक की सभी कामना पूर्ण होने के साथ ही, शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है और संतान प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत के दिन प्रातः सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए। स्नान कर पूजन स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करने के बाद, मंडप में पद्म पुष्प की आकृति पांच रंगों से बनाई जाती है और आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है। तदपश्चात् उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शंकर का पूजन और मंत्र का जाप करना चाहिए। अंत में आरती करके दो ब्रह्माणों को भोजन करायें तथा अपने सामथ्र्य अनुसार दान दक्षिणा देकर आशिर्वाद प्राप्त करें। प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा से अमोघ फल की प्राप्ति होती है।

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