Rahukaal Today/ 15 June 2017 (Delhi)-21 June 2017

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रोहिणी और जामुन
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रोहिणी और जामुन

 

आकाश मंडल में नक्षत्रों के क्रम में रोहिणी नक्षत्र चैथे स्थान पर आता है । यह 5 तारों का समूह है । पृथ्वी से देखने पर यह भूसा गाड़ी जैसी आकृति का दिखता है । रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है । रोहिणी चंद्रमा की सबसे सुंदर पत्नी का नाम है । इस नक्षत्र में जन्मे जातक की राशि वृष और राशि का स्वामी शुक्र है । इस नक्षत्र का वृक्ष जामुन है ।

शुभ नक्षत्र- रोहिणी नक्षत्र शुभ नक्षत्रों की श्रेणी में आता है । इस नक्षत्र के दौरान किए गए सभी कार्य सिद्ध होते हैं ।

शारीरिक गठन- रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक देखने में सुंदर तथा बड़ी-बड़ी आंखों वाले दुबले-पतले होते हैं ।

स्वास्थ्य- इस नक्षत्र में जन्मे जातक शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं । ये जल्द बीमार पड़ जाते हैं । इन्हें अक्सर मुंह, गले, जीभ एवं गर्दन से सम्बंधित रोग होते हैं तथा ये मानसिक रूप से काफी स्वस्थ होते हैं ।

भौतिक सुख- इस नक्षत्र के जातक एक धनवान और ऐश्वर्यशाली जीवन व्यतीत करते हैं । इन्हें स्त्री और वाहन दोनों का सुख मिलता है । ये लोग एजेंट, जज, फैंसी आइटमों के व्यापारी, जमीन, खेती, साहित्य आदि से धन-वैभव और सत्ता प्राप्त करते हैं ।

सकारात्मक पक्ष- रोहिणी नक्षत्र वाले सत्यवक्ता, मीठा बोलने वाले, स्थिर बुद्धि, धनवान, कृतज्ञ, मेधावी, संवेदनशील, सौम्य स्वभाव वाले, ज्ञानयुक्त, धर्म-कर्म में कुशल, सम्मोहक तथा सदा ही प्रगतिशील होते हैं । साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य प्रेमी, कला तथा संगीत में रुचि रखने वाले होते हैं । ये लोग अपने घर या कार्य-क्षेत्र पर व्यवस्थित रहना पसंद करते हैं।

नकारात्मक पक्ष- इस नक्षत्र में जन्म के समय यदि शुक्र और चन्द्र खराब स्थिति में हांे तो जातक दूसरों की कमियों को उजागर करने वाला तथा भूत-प्रेत में विश्वास रखकर उन्हें साधने वाला होता है । इस सबके चलते ये स्वार्थी स्वभाव के हो जाते हैं ।

शांति उपाय- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है । इसलिए चन्द्रमा की शांति के लिये सोमवार के दिन चावल, चीनी, आटा, सफेद वस्त्र, दूध, दही, नमक, घी तथा चांदी का दान करना चाहिए । इसके अलावा सोमवार को नमक रहित व्रत करें ।

रोहिणी नक्षत्र का वृक्ष जामुन- खट्टे-मीठे स्वाद वाला फल जामुन एक सदाबहार वृक्ष है । इसका वैज्ञानिक नाम ‘साइजीजियम क्यूमिनाइ’ है । जामुन का पेड़ भारत के अलावा दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी पाया जाता है । जामुन के अलावा इसे राजमन, काला जामुन, जमाली, अंग्रेजी में ब्लैकबेरी के नाम से जाना जाता है । प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है, परंतु स्वाद में अच्छा होता है । अम्लीय प्रकृति के कारण ही इसे नमक के साथ खाया जाता है । जामुन स्वाद के साथ साथ सेहत के लिहाज से भी एक अच्छा और लाभदायक फल है । जामुन के फल में बहुत से पोषक तत्व पाये जाते हैं । इसमें ग्लूकोज और फ्रूक्टोज दो मुख्य स्त्रोत होते हैं । साथ ही इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाॅस्फोरस और सोडियम भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । फल के साथ-साथ इसके बीज में भी काब्रोहाइट्रेट्स, प्रोटीन व कैल्शियम पाया जाता है । ‘चरक संहिता’ में जामुन की छाल, पत्ते, फल, गुठलियों व जड़ से औषधि बनाने के बारे में बताया गया है । मधुमेह को नियंत्रण करने में तो यह बहुत ही कारगर है । इसकी गुठली को सुखाकर, पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से मधुमेह के रोगी को काफी राहत मिलती है, क्योंकि इसकी गुठली में ‘जंबोलीन’ नामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है जो स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है । जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक होते हैं और भूख बढ़ती है । एसिडिटी की समस्या दूर करने के लिए काले नमक और भुने जीरे के साथ जामुन खाने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है । कीमोथैरेपी और रेडिएशन के दौरान भी जामुन का सेवन लाभकारी होता है । यह हृदय रोगों व रक्तचाप को नियंत्रित करने और खून बढ़ाने में मददगार है । चेहरे की रौनक बढ़ाने के लिए जामुन के गूदे का पेस्ट बनाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर लगाएं । जामुन की छाल को बिल्कुल बारीक पीसकर इसके सत को पानी में घोलकर गरारे से गला साफ होने के साथ सांस की दुर्गंध और मसूढ़ों की परेशानी भी दूर होती है । किसी विषैले जानवर के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए या काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों को बांधने से घाव ठीक होने लगता है । कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए और न ही कभी जामुन खाने के बाद दूध का सेवन करना चाहिए ।

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