Rahukaal Today/ 21 April 2017 (Delhi)-27 April 2017

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तन्नो सूर्यः - छठ पूजा
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तन्नो सूर्यः - छठ पूजा

 

 

सुबह उठकर सूर्य की ओर मुंह करके हाथों को सिर से ऊपर उठाकार सूर्य को जल देने की प्रकिृया मात्र धार्मिक ही नही बल्कि वैज्ञानिक भी है! क्योकि जब हम जल को ऊपर से गिराते हैं, तो सूर्य की किरणे जल की धारा से परावर्तित होकर हमारे शरीर पर पड़ती हैं और हमारे स्नायुतंत्र को मजबूत बनती हैं। इसी प्रकार कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को जल देना हमारे स्वास्थ्य को पुष्ट करने का सशक्त माध्यम है।

सूर्य को अध्र्य देना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। दरअसल जब हम लोटे से जल को सूर्य के समक्ष गिराते है तो सूर्य की किरणें परावर्तित होकर जितनी बार आँखों तक पहुँचती है, उससे हमारा स्नायुतंत्र सक्रिय हो जाता है और दिमाग की कार्य क्षमता बढ़ जाती हैं। छठ के दिन जो ग्रह नक्षत्रों की स्थिति होती है। उसमें कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्ययोदय और सूर्यास्त के समय अध्र्य देना निश्चय ही हमारे स्वास्थ को पुष्ट करने का एक सशक्त वैज्ञानिक माध्यम है।

 

 

छठ का त्योहार सूर्योपासना का पर्व होता है। सायंकाल और अगले दिन प्रातः काल में सूर्य की पहली किरण को अर्घ देकर नमन किया जाता है। सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है, सुख-स्मृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का यह त्योहार सभी समान रुप से मनाते हैं। प्राचीन धार्मिक संदर्भ में यदि इस पर दृष्टि डालें तो पाएंगे कि छठ पूजा का आरंभ महाभारत काल के समय से देखा जा सकता है। छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना कि जाती है तथा गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर के किनारे पानी में खड़े होकर यह पूजा संपन्न कि जाती है। इस बार छठ पूजा का आरंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी, 4 नवम्बर से आरंभ होकर कार्तिक शुक्ल सप्तमी, 6 नवम्बर को सम्पन्न हो रही है। इस लम्बे अंतराल में व्रतधारी पानी भी ग्रहण नहीं करता। बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में छठ पर्व पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। छठ त्योहार के लिये लोग फल, गन्ना, डालिया और सूप आदि खरीदते हैं। घर के सभी लोग व्रती के साथ तीन दिन तक सुबह और शाम को घाट पर उसी श्रद्धा के साथ जाते है। इस पर्व का आयोजन बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त, देश के कोने-कोने में देखा जा सकता है। देश-विदेशों में रहने वाले भारतीय भी इस पर्व को बहुत धूम धाम से मनाते हैं। यह व्रत अधिकतर घर की महिलाएं ही करती है। घाट पर मेले जैसा माहौल होता है। छठ पूजा व्रत का आरंभ नहा खा, खरना, लोहंडा, साँझ अर्ध सूर्योदय अर्ध से संपन्न होती है। व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत करते हैं व्रत समाप्त होने के बाद ही व्रती अन्न और जल ग्रहण करते हैं। खरना पूजन से ही घर में देवी षष्ठी का आगमन हो जाता है। इस प्रकार भगवान सूर्य के इस पावन पर्व में शक्ति व ब्रह्मा दोनों की उपासना का फल एक साथ प्राप्त होता है। षष्ठी के दिन घर के समीप ही किसी नदी या जलाशय के किनारे पर एकत्रित होकर पहले दिन से तीसरे दिन तक इस महा पर्व की श्रद्धा को संपन्न करते हुये अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्ध देने के साथ ही इस पर्व की समाप्ति होती है। छठ के महा पर्व का वैज्ञानिक स्वरुप- छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पर्व लोगों को स्वच्छता के साथ प्रकृति को संरक्षित करने का संदेश भी देता है। आयुर्वेद में प्राकृतिक में पाई जाने वाली चीजो का बहुत महत्व है अदरक, मूली, गाजर, हल्दी जैसी गुणकारी सब्जियों से अर्ध देना भी इसी का संदेश है। यह पर्व लोगों को प्रकृति के समीप लाता है। सुबह प्रातः उठ कर सूर्य को अर्ध देना भी प्राकृतिक के स्वरुप को समझाता है। जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। साथ ही साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जाता है, जो हमें विभिन्न बीमारियों से बचाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कमर तक पानी में डूबकर सूर्य की ओर देखना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इससे टाक्सिफिकेशन की प्रक्रिया होती है। इससे सूर्य की किरणों में 16 कलाएं होती हैं। जैसे प्रतिबिंब अपवर्तन, डेविस्मन, स्कैटरिंग, डिस्पर्शन, वाइब्रेशन इत्यादि। लोटे से आड़े तिरछे जल की धारा से सूर्य की किरणों परावर्तित होकर जितनी बार आंखों तक पहुंचती हैं, उससे स्नायुतंत्र जो शरीर को नियंत्रित करते हैं, सक्रिय हो जाता है। दिमाग की कार्य क्षमता बढ़ जाती है। आज के वर्तमान कल की भाग दौड़ की जीवन शैली में हम अपने आप को एक मशीनरी तन्त्र की तरह प्रयोग करते है जिस में हम ये भूल जाते हैं प्रकृति से ही जीवन की उत्पत्ती हुई है। ये पर्व हमें पुनः जीवन की ओर ले जाने का कार्य करता है। हमें प्राकृति के अनमोल स्वरुप से अवगत करता है।

सूर्य देव का पुत्र की प्राप्ति मंत्र-

ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे।

धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात।।

हृदय, नेत्र, पीलिया, कुष्ठ रोगों को नष्ट करने के मंत्र-

ऊँ हृां हृीं सः सूर्याय नमः।

व्यवसाय में वृद्धि के मंत्र-

ऊँ घृणिः सूर्य आदिव्योम।

शत्रुओं के नाश के मंत्र-

शत्रु नाशाय ऊँ हृीं हृीं सूर्याय नमः।

मनोकामनाओं की पूर्ति के मंत्र-

ऊँ हृां हृीं सः।

ग्रहों की दशा के निवारण मंत्र-

ऊँ हृीं श्रीं आं ग्रहधिराजाय आदित्याय नमः।

सूर्यदेव को चन्दन समर्पण मंत्र-

दिव्यं गन्धाढ़्य सुमनोहरम्।

वबिलेपनं रश्मि दाता चन्दनं प्रति गृह यन्ताम्।।

वस्त्रादि अर्पण करने के मंत्र-

शीत् वातोष्ण संत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।

देहा लंकारणं वस्त्र मतः शांति प्रयच्छ में।।

सूर्यदेव की पूजा के मंत्र-

नवभि स्तन्तु मिर्यक्तं त्रिगुनं देवता मयम्।

उपवीतं मया दत्तं गृहाणां परमेश्वरः।।

सूर्यदेव को घृत स्नान कराने के मंत्र-

नवनीत समुतपन्नं सर्व संतोष कारकम्।

घृत तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थ प्रति गृहयन्ताम्।।

सूर्यदेव को अर्घ समर्पण करने का मंत्र-

ऊँ सूर्य देवं नमस्तेस्तुगृहाणं करूणाकरं।

अर्घ्यं च फलं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतैयुतम्।

सूर्य को गंगाजल समर्पण करने का मंत्र-

ऊँ सर्व तीर्थं समूदभूतं पाद्य गन्धदि भिर्युतम्।

प्रचंण्ड ज्योति गृहाणेदं दिवाकर भक्त वत्सलां।।

सूर्यदेव को आसन अर्पण करने का मंत्र-

विचित्र रत्न खन्चित दिव्या स्तरण सन्युक्तम्।

स्वर्ण सिंहासन चारु गृहीश्व रवि पूजितां।।

सूर्यदेव का आवाहन मंत्र-

ऊँ सहस्त्र शीर्षाः पुरूषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र पाक्ष।

स भूमि ग्वं सब्येत स्तपुत्वा अयतिष्ठदर्शां गुलम्।।

सूर्य को दुग्ध से स्नान कराने का मंत्र-

काम धेनु समूद भूतं सर्वेषां जीवन परम्।

पावनं यज्ञ हेतुश्च पयः स्नानार्थ समर्पितम्।।

सूर्यदेव को दीप दर्शन कराने का मंत्र-

साज्यं च वर्ति सं बह्निणां योजितं मया।

दीप गृहाण देवेश त्रैलोक्य तिमिरा पहम्।।.

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The festival of Chath is celebrated to revere the diety Sun. The Sun is revered early in the morning and when the Sun sets. First of all Sun is revered when it is about to set in the west followed by the next day when the first beam of Sun rays fall on earth. Surya Shashthi fast is also known as Chath. It is believed that it brings lots of prosperity and hence most of the people celebrate this in the form of festival.If we pay a glimpse on our vedic scriptures, we will find that the ritual of keeping fast on this day was observed even during Mahabharat kaal. Chath devi is the sister of Lord Sun and to make her happy, we all rever Sun. The festival is celebrated beside the pious rivers like Ganga or Yamuna or by digging any pokhar and standing in it and offering ardhya or Jal to Lord Sun. Pokhar is created if the individual cant manage to go to any holy river. The festival of Chath puja is celebrated with pomp and show from first day to the fourth day with a deep faith in the heart. It is the most difficult and highly significant fast of four days. The fast beguns on Kartika Shukla Chaturthi and ends on Kartika Shukla Saptami. During this long tenure, the person keeping fast does not take any food or water. The festival is celebrated with lots of enthusiasm in the eastern areas of Bihar and Uttar Pradesh.  People make lots of purchasing during the festival of Chath puja especially they buy branches of sugarcane, other fruits, soop (to keep all these items) etc. Before Chath puja begins, all the family members visit the ghat with the person keeping fast with same devotion on mornings and evenings. Though the festival is commonly and populrly seen in Bihar and Uttar Pradesh but its effect can also be seen in different parts of India . Not only people living in India but devotees dwelling abroad keeps this fast and celebrate the festival with complete faith. Usually, females of the family keeps the fast. The festival and fast of Chath fills the individuals with lots of enthusiasm, courage and positivity. The atmosphere looks revived and the ghats of various riversides organise fairs. The beginning of Chath puja follows a perfect sequence where the person keeping fast get free from the daily routine and then take shower. Thereafter, the lady goes through kharna, lohanda, sangha, ardhya and suryodaya ardhya . The person keeps fast without taking even a drop of water. The lady takes her meal or water only after the fast comes to an end. The goddess Shashthi pays a visit to the devotees house with the beginning of Kharna puja. It is believed that in this fast the devotees can attain the fruits equivalant to the reverence of Goddess Shakti and Lord Brahma. On the shashthi tithi, the person gets a well digged in the proximity of her/ his house and all the people conglomerate near pond or river for three days continuously. The festival is of high significance and the devotees with a deep faith ends the fast after offering ardhya to Sun. Chath puja also bears scientific significance. The festival teaches a lesson to the public where they should serve the nature while keeping their surrounding clean. In Ayurveda, the natural ingredients bear special significance. Some of the popular things revered are ginger, radish, carrot and turmeric that have remarkable medicinal properties. The devotee offers jal with these natural vegetations and send a message that we should live in harmony with the nature. The festival brings people close to nature. Offering ardhya to Sun early morning is also a lesson taught by this festival which bestows many health benefits to us. Offering ardhya not only keeps us healthy and but saves us from many diseases. Scientists believe that standing in water till waist line bestows us with many health benefits. It does toxification i.e. elimination of toxins. Sunrays performs 15 types of phenomenons. Some of them are Pratibimb, aparvartan, devisman, skatering, dispersion, vibration, etc.When the person offers Jal to Sun, the jal falls on ground in a twisted and turned pattern through the soop. The number of times the Sunrays reaches our eyes, it activates our nervous system which goverens our body. As a result our body comes in a balanced state and activates the working ability of our brain. In the exsting era of hectic and fast world, we fail to improve on the working efficiency of our body and we forget that nature has bestowed us the gift of life. This festival connects us with nature. This oldest festival of Chath reminds us of our religion, tradition and culture and makes us a tough individual. When an individual offers ardhya to Sun after taking bath early in the morning, he strengthens himself physically, emotionally and spiritually. The reason is scientific simple but scientific.

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