Rahukaal Today/ 25 February 2017 (Delhi)-3 March 2017

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गोवर्धन पूजा
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31 अक्टूबर, गोवर्धन पूजा

 

अर्पण छप्पन भोग प्रभु को

करिये पूजा मनमोहन की

 

इस पूजा को भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग मे ब्रजवासियों के द्वारा की जाने वाली देवराज इंद्र के स्थान पर प्रारम्भ की थी। उनकी इस बात से इंद्र देव ने नाराज होकर सात दिनों तक बहुत ही भयंकर वर्षा की थी जिस कारण पूरा ब्रज मण्डल डूबने लगा था। ब्रजवासियों की इस परेशानी को देखकर सभी की सहायता के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी तर्जनी पर सप्तकोशी परिधि वाले विशाल गोवर्धन पर्वत को धरण कर सारे ब्रज वासियों को इस भयंकर वर्षा से बचने के लिए आश्रय दिया था। पूरे सात दिनो तक यह वर्षा हुयी थी। लेकिन ब्रज वासियों को कोई भी परेशानी नहीं हुयी थी तब देवराज इंद्रा ने श्री कृष्ण की इस अलौकिक लीला के सम्मुख नतमस्तक होकर अपने द्वारा किए करे पाप की क्षमा मांगी। इसके बाद श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत का पंचामृत से अभिषेक कर 56 भोगों और 36 व्यंजनों का भोग लगाकर उनका विधि-पूर्वक पूजन किया। इसी परंपरा को ध्यान मे रखते हुये सारे ब्रज मे दीपावली के दूसरे दिन यह पर्व बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। ब्रज मे ही नहीं उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड हरियाणा व पंजाब मे भी इस पर्व को बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। आजकल बिहार और उड़ीसा मे गायदौड़ नाम का उत्सव मनाया जाता है, जो अपराहन मे कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होता है। वृंदावन और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। गोवर्धन उत्सव श्रीविष्णु भगवान की प्रसन्नता के लिए मनाया जाता है। इस पूजा से पुत्र, पौत्रादि संततियां प्राप्त होती हैं, ऐश्वर्य और सुख की वृद्धि होती है। गोवर्धन पर्वत की पूजा मे वे लोग जाते है जो गोवर्धन पर्वत के पास रहते है लेकिन जो लोग दूर रहते है वे इस पर्वत की आकृति बनाकर 16 उपचारों से गोवर्धन और कृष्ण की पूजा करते है। सर्वप्रथन प्रातः काल स्नान करके ताजे पकवान बनाये जाते है। इसके बाद मिट्टी या गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनायी  जाती है। इसके साथ ही गाय, भैंस, खेत खलिहान, बैल, औजार, दूध, दही आदि बनाया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से पूजा करके नवैद्य चढ़ाया जाता है। इसके बाद आरती करें फिर प्रसाद के रुप में दही व चीनी का मिश्रण सब में बांट दें। दान-दक्षिणा दें। उसके  बाद  घर के सारे सदस्य एक साथ भोजन करते है। सभी पर्वतों मे श्रेष्ठ गोवर्धन पर्वत को पर्वतों का राजा माना जाता है। इस दिन दुखी रहने वाला व्यक्ति साल भर दुखी रहता है। इसलिए हर व्यक्ति को इस पर्व पर खुश रहकर पूर्ण भाव से इस पर्व को मनाना चाहिए। इस पूजा से व्यक्ति के जीवन से दुख और दरिद्रता दूर होता है और उसके जीवन मे सुख समृद्धि का वास होता है इस दिन खुश रहें और आनंद मंगल करें। अच्छा भोजन करें, बढ़िया वस्त्र धारण कर घूमने  फिरने जायें तो वर्ष भर आनंद मंगल के साथ बीतेगा। भूल कर भी इस दिन दुखी या परेशान ना हो सभी चिंताओं से मुक्त होकर यह दिन व्यतीत करें। स्वयम ही चिंताएं आपसे सदा के लिए दूर हो जाएंगी।

 

 

Govardhan Puja

This puja was started by Lord Shri Krishna in Dwapar yuga. In earlier times, Lord Indra was revered by the people of Brija but after Shri Krishna came into existence, people started praying him on his place. Lord Indra became very much angry and started raining heavily. As a result of thing, the entire Brijmandal started immersing in water. Shri Krishna could not see this situation and came forward to assist the people of Brij. He lifted Govardhan mountain on his small finger.He saved the entire city of Brij by offering shelter to each and every individual. The rain and thunderstorm took place for the entire seven days. However, people of Brij did not feel any issues because Lord Indra realised his mistake and ask for an apology from Shri Krishna. He bowed his head and humbly asked to excuse him. After this incidence Shri Krishna did abhishek of Govardhan mountain with the panchamrit and offered 56 types of food items and 36 types of sweets and did step by step pujan of the mountain. Keeping this festival in mind, the people of Brij celebrate the Govardhan puja with lots of enthusiasm the very next day of Diwali. Not only in Brij, but the festival is celebrated across the entire Bihar, Gharkhand, Haryana and Punjab with lots of pomp and show. These days, a popular festival by the name of gai dor (Cow racing ) is celebrated in Bihar and Orissa. It takes place in during Kartika Shukla pratipada. Annakuta festival and Govardhan puja  are celebrated in Vrindavan and Mathura. Govardhan pujan is celebrated to delight Lord Vishnu. All those who rever Lord Vishnu on this day get consecrated with son, daughters, grandsons and grand daughters apart from getting happiness, success, good fortune, health and wealth. In this puja, all those who live close to the mountain visit the Govardhan mountain, however those who lives at a great distance create its image and then rever Lord Krishna and the Govardhan mountain with 16 upchaars. Prayers are performed and nevaidya is offered. People sing aarti and then accept the prasaad of curd and sugar. Donations are offered to the pandits. After this, all the family members sit together and eat food. The Govardhan mountain is considered as the topmost mountain. It is also considered as the most blessed mountains among all. A person who mourns on this day stays unhappy throughout the year. Hence, it is believed that this festival should be celebrated with ecstasy and high enthusiasm. All those who do the reverence of Govardhan puja on this day, shuns monotony, gloominess and poverty miles away. They are blessed with happiness, prosperity and all round success throughout the year. Hence, it is suggested that everyone stays happy and enjoy at their optimum.

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