Rahukaal Today/ 17 January 2017 (Delhi)-23 January 2017

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रौशनी का त्योहार लाये चेहरे पर मुस्कान
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दीपावली पूजन मुहूर्त अमावस्या तिथि
दोपहर पहले 10:41 से 11:48 रात में 23:08 तक
दोपहर 14:00 से 14:50 ही रहेगी।
प्रदोष काल 17:36 से 19:13
शाम 20:23 से 22:38
महानिशीथ काल 23:30 से 24:22
सिंह लग्न अर्धरात्रि 01:02 से 03:19

शास्त्रों में दीपावली को मनोरथ सिद्धि का दिन कहा गया है। दीपावली सबसे शुभ मुहूर्त है। इस दिन की गई पूजा सफल होती है, सुख, सौभाग्य, रिद्धि सिद्धि व आरोग्य मिलता है। इस दिन सभी देवता प्रसन्न मुद्रा में होते हैं, अर्थात् मांग लो जो मांगना है। 
पूजा विधि- दीवाली पूजन के लिए घर की साफ सफाई करके पूजा घर में एक चैकी रखकर उस पर मौली बाधकर इस पर गणेश जी की व लक्ष्मी जी की मिट्टी या चांदी की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें तिलक लगाये। चैकी पर सात घी के तथा एक सरसों के तेल का दीपक रखना चाहिए। फिर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, रोली, धूप आदि से विधिवत पूजन करना चाहिए। पूजन करने के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें। इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेश जी तथा लक्ष्मी जी की मूर्ति रखकर विधिवत् पूजा करें। अपने व्यापार के स्थान पर बहीखातों की पूजा करें और दुकान की गद्दी की भी विधि-पूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसके बाद घर की बहू-बेटियों को रुपये दें। लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। रात के समय बारह बजे करना चाहिए। रात को बारह बजे दीपावली पूजन के बाद चूने या गेरु में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल-बट्टा तथा सूप पर तिलक करना चाहिए। रात्रि की ब्रह्मबेला अर्थात् प्रातः काल चार बजे उठकर स्त्रियां बैठ लक्ष्मी भाग दलिदुर कहते हुये सूप पीटकर दरिद्रता भगाती हैं। सूप लेकर पूरे घर में चक्कर लगाते हुये घर के मुख्य द्वार से बाहर तक जाना चाहिए। लक्ष्मीजी को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए वस्त्र में लाल, गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र, पुष्प में कमल या कोइ लाल फूल, फल में श्रीफल, बेर, अनार व सिंघाड़े, सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र अनाज में चावल, केसर की मिठाई या हलवा, दीप जलाने के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल, गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, सिल्क का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें। 
चैकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि लक्ष्मी गणेश एक लाइन में न होकर थोड़े तिरछे हो जिससे एक दूसरे पर उनकी थोड़ी नजर पड़े। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठें। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे इसे कलश पर रखें। कलश वरुण का प्रतीक है। दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चैकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। मूर्तियों वाली चैकी के सामने छोटी चैकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश के एक तरफ एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह रुप नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर सोलह मातृका की प्रतीक चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।
इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचों बीच ऊँ लिखें। छोटी चैकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। 
थाली में खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुमकुम, सुपारी, पान, फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।
इन थालियों के सामने स्वयं बैठें। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।
सबसे पहले पवित्रीकरण करें।
आप हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।
ऊँ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।
यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः।।
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः
कूर्मोदेवता आसने विनियोगः।।
अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-
ऊँ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः
अब आचमन करें पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए- ”ऊँ केशवाय नमः“ और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ऊँ नारायणाय नमः फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-
ऊँ वासुदेवाय नमः फिर ऊँ षिकेशाय नमः कहते हुए हाथों को खोलें और अंगूठे के मूल से होंठों को पोंछकर हाथों को धो लें। तिलक लगाये। पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है। उसके लिए हाथ में पुष्प, अक्षत, द्रव्य और थोड़ा जल लेकर पूजा का संकल्प करें। सबसे पहले गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। उसके बाद वरुण पूजा यानी कलश पूजन करनी चाहिए। हाथ में थोड़ा सा जल ले लीजिए और आह्वान व पूजन मंत्र बोलिए और पूजा सामग्री चढ़ाइए। फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन करें। हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प ले लीजिए। सोलह माताओं को नमस्कार कर लीजिए और पूजा सामग्री चढ़ा दीजिए। सोलह माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन होता है। रक्षाबंधन विधि में मौली लेकर भगवान गणपति पर चढ़ाइए और फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिए और तिलक लगा लीजिए। अब महालक्ष्मी की पूजा प्रारंभ कीजिए। मां लक्ष्मी अपने भक्तों की धन से जुड़ी हर तरह की समस्याएं दूर करती हैं। इतना ही नहीं, देवी साधकों को यश और कीर्ति भी देती हैं। 
उपाय- धन लाभ के लिए दीपावली की रात चैकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, उस पर गेंहू से स्वास्तिक बनाएं, इनके ऊपर एक थाली रखें, थाली में कुंमकुंम से ‘गं’ लिखें, इसके ऊपर श्वेतार्क गणपति, श्रीफल व 7 कौडियां रखें, चंदन माला से 5 बार मंत्र जाप करें- 
ऊँ सर्व सिद्धि प्रदीयसि त्वं सिद्धि 
बुद्धिप्रदो भवः श्रीं।
अगले दिन 5 कन्याओं को पीला भोजन कराएं, श्वेतार्क को पूजाघर में रख दें, बाकी सामग्री जल में प्रवाहित कर दें। 
दीपावली के दिन तुलसी की पूजा व रात्रि में कच्चे सूत को शुद्ध केसर से रंग कर निम्न मंत्र का 5 माला जाप करने के पश्चात कार्य स्थल में रखने से व रोजाना इसके दर्शन व पूजा से उन्नति मिलती है।
ऊँ श्रीं श्रीं ह्रीं ह्रीं ऐश्वर्य महालक्ष्म्यै पूर्ण सिद्धिं देहि देहि नमः। 
श्वेतार्क की जड़ श्री गणेश का प्रतिरुप समझी जाती है। दीपावली के दिन इस जड़ की पूजा स्थल पर प्राण प्रतिष्ठा की जाए और रोजाना महालक्ष्मी जी के निम्न मंत्रों के साथ उनकी व महालक्ष्मी जी की पूजा की जाए तो माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
ऊँ ह्रीं अष्टलक्ष्म्यै दारिद्र विनाशिनी सर्व सुख समृद्धिं देहि देहि ह्रीं ऊँ नमः। 
दीपावली पर चांदी से निर्मित दो गाय अभिमंत्रित कराकर एक गाय किसी विद्वान ब्राह्मण को दान देने व दूसरी गाय को ‘कामधेनु देवी’ की भांति घर के पूजन स्थल पर रखकर नित्य दर्शन व पूजन करने से महालक्ष्मी का वास होता है। ऊँ ह्रीं क्लीं महालक्ष्मयै नमः दीपावली पर श्री लक्ष्मी की तस्वीर या यंत्र के सम्मुख दीपावली से शुरु कर के नित्य इस मंत्र का 5 माला जाप करने से धन आगमन होता है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन घरों में ही नहीं, दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी किया जाता है। कर्मचारियों को पूजन के बाद मिठाई, बर्तन और रुपये आदि भी दिए जाते हैं। दीपावली पर कहीं-कहीं जुआ भी खेला जाता है। इसका प्रधान लक्ष्य वर्ष भर के भाग्य की परीक्षा करना है। इस प्रथा के साथ भगवान शंकर तथा पार्वती के जुआ खेलने के प्रसंग को भी जोड़ा जाता है, जिसमें भगवान शंकर पराजित हो गए थे। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर की तरंग पर सुख से सोते हैं और लक्ष्मी जी भी दैत्य भय से विमुख होकर कमल के उदर में सुख से सोती हैं। इसलिए मनुष्यों को सुख प्राप्ति का उत्सव विधिपूर्वक करना चाहिएं।
पूजा से किन फलों की प्राप्ति होती है-
इनकी पूजा से केवल धन ही नहीं, बल्कि नाम, यश भी मिलता है। इनकी उपासना से दाम्पत्य जीवन भी बेहतर होता है। कितनी भी धन की समस्या हो, अगर विधिवत लक्ष्मीजी की पूजा की जाए, तो धन मिलता ही है।
मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप स्फटिक की माला से करने पर वह तुरंत प्रभावशाली होता है। मां लक्ष्मी के विशेष स्वरुप हैं, जिनकी उपासना शुक्रवार के दिन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
धन लक्ष्मी की पूजा-
चित्र के समक्ष घी का एक बड़ा सा दीपक जलाएं। इसके बाद उनको इत्र समर्पित करें। वही इत्र नियमित रुप से प्रयोग करें। वृष, कन्या और मकर राशि वालों के लिए धन लक्ष्मी की पूजा विशेष लाभकारी होती है।
धन की बचत के लिए-
मां लक्ष्मी के उस स्वरुप की स्थापना करें, जिसमें उनके पास अनाज या चावल की ढेरी हो। उनके सामने घी का दीपक जलाएं, उनको चांदी का सिक्का अर्पित करें। पूजा के उपरान्त उसी चांदी के सिक्के को अपने धन स्थान पर रख दें। 
मिथुन, तुला और कुम्भ राशि वालों के लिए धान्य लक्ष्मी के स्वरुप की आराधना विशेष होती है।
कारोबार में धन की प्राप्ति के लिए-
लक्ष्मीजी के उस स्वरुप की स्थापना करें, जिसमें दोनों तरफ उनके साथ हाथी हों। लक्ष्मीजी के समक्ष घी के तीन दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी को एक गुलाब का फूल अर्पित करें। पूजा के उपरान्त उसी गुलाब को अपने धन वाली जगह पर रख दें। रोज इस गुलाब को बदल दें। वृष, कन्या, धनु, मकर और मीन राशि के कारोबारी लोगों के लिए गजलक्ष्मी की पूजा विशेष होती है।
नौकरी में धन की बढ़ोतरी के लिए-
गणेशजी के साथ लक्ष्मीजी की स्थापना करें। गणेशजी को पीले और लक्ष्मीजी को गुलाबी फूल चढ़ाएं। लक्ष्मीजी को अष्टगंध चरणों में अर्पित करें। नित्य प्रातः स्नान के बाद उसी अष्टगंध का तिलक लगाएं।
कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के लिए ऐश्वर्य लक्ष्मी की पूजा विशेष होती है।
धन के नुकसान से बचने के लिए-
लक्ष्मीजी के उस स्वरुप की स्थापना करें, जिसमें वह खड़ी हों और धन दे रही हों। उनके चरणों में नित्य प्रातः एक रुपये का सिक्का अर्पित करें। सिक्कों को जमा करते जाएं और महीने के अंत में किसी सौभाग्यवती स्त्री को दे दें।
मेष, सिंह और धनु राशि के लोगों के लिए वरलक्ष्मी के स्वरुप की उपासना अदभुत होती है।
दीपावली की रात देवी लक्ष्मी के साथ एक दंत मंगलमूर्ति गणपति की पूजा की जाती है।
पूजा स्थल पर गणेश लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के पीछे शुभ और लाभ लिखा बीच में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है।

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