Rahukaal Today/ 17 January 2017 (Delhi)-23 January 2017

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14 जनवरी 2017, मकर संक्रांति
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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति मुहूर्त

पुण्य काल- 07:25:51 से 12:30:00 तक अवधि-5 घंटे 4 मिनट

महापुण्य काल- 07:15:14 से 09:15:14 तक अवधि-2 घंटे 0 मिनट

संक्रांति पल- 07:25:51

 



भारतीय पंचांग में वर्ष को दो भागों में बांटा गया है- उत्तरायण और दक्षिणायण। सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उस प्रक्रिया को संक्रांति कहते हैं। पौष मास में इस दिन सूर्य, धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है, इसीलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। वैसे तो यह त्योहार जनवरी माह की 14 तारीख को मनाया जाता है, लेकिन कभी-कभी मकर संक्रांति की तारीख बदल भी जाती है, क्योंकि यह त्योहार पूरी तरह से सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। दरअसल यह सोलर कैलंडर को फालो करता है। दूसरे त्योहारों की गणना चंद्र कैलेंडर के आधार पर होती है। यह चक्र हर अस्सी-सौ साल में एक बार बदल जाता है और तब यह त्योहार एक दिन बाद मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ हो जाती है। उत्तरायण को सकरात्मकता का प्रतीक माना जाता है। उत्तर प्रदेश में स्थित प्रयाग और वाराणसी में इसी के साथ माघ मेला शुरु होता है तो केरल में सबरीमाला। इस दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी पाप धुल जाते हैं। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों को विशेष महत्व दिया जाता है। अलग-अलग प्रदेशों में इसे अलग-अलग विधियों के साथ मनाया जाता है। देश के अधिकतर हिस्सों में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। जबकि तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में माघी, असम में बीहू, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरला में संक्रांति व उत्तर प्रदेश में खिचड़ी भी कहते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है, जिसे संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है, चाहे इसका नाम व मनाने का तरीका कुछ भी हो। भारत के साथ नेपाल, थाइलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, श्रीलंका आदि जगहों पर भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है।

पतंग

पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत संभवतः भगवान श्री राम के समय में हुई थी। किवंदती है कि तमिल की तन्दनानरामायण के अनुसार मकर संक्रांति के दिन राम ने जब पतंग उड़ायी तो पतंग इन्द्रलोक में पहुंच गयी। पंतंग को देखकर इन्द्र के पुत्र जयंत की पत्नी सोचने लगी-जिसकी पतंग ऐसी है वह कैसा होगा। इस भाव के मन में आते ही उन्होंने पतंग को हस्तगत कर लिया और सोचने लगी कि पतंग उड़ाने वाला अपनी पतंग लेने के लिए अवश्य आएगा। वह प्रतीक्षा करने लगी। उधर पतंग पकड़ लिए जाने के कारण पतंग दिखाई नहीं दी, तब बालक श्रीराम ने बाल हनुमान को पता करने के लिए कहा। पवन पुत्र हनुमान आकाश में उड़ते हुए इंद्रलोक पहुंच गए। वहां जाकर उन्होंने देखा कि एक स्त्री उस पतंग को अपने हाथ में पकड़े हुए है। उन्होंने उस पतंग की मांग की। तब जयंत की पत्नी ने हनुमान जी से पूछा की-”यह पतंग किसकी है?“ हनुमान जी ने श्री रामचंद्र जी का नाम बताया। तब जयंत की पत्नी ने श्री रामचंद्र जी के दर्शन करने की इच्छा प्रकट की। हनुमान जी ने लौटकर सारा वृत्तांत श्रीराम को बताया। श्रीराम ने यह सुनकर हनुमान को वापस भेजा कि वे उन्हें चित्रकूट में अवश्य ही दर्शन देंगे। हनुमान ने यह उत्तर जयंत की पत्नी को सुनाया, जिसे सुनकर जयंत की पत्नी ने पतंग छोड़ दी। कथन है कि...

तिन तब सुनत तुरंत ही, दीन्ही छोड़ पतंग।

खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।।

वैज्ञानिक कारण- पौष मास में अधिक सर्दी होने के कारण हमारा शरीर कई बीमारियों से ग्रसित हो जाता है जिसका हमें पता ही नहीं चलता। इस मौसम में त्वचा भी रुखी हो जाती है। वैसे तो सूर्य की किरणें औषधि का काम करती हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होता है। जिससे सूर्य की किरणें हमारे शरीर के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होती हैं। इस दिन पतंग उड़ाते समय हमारा शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आता है, जिससे अनेकों शारीरिक रोग स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।

तिल-गुड़ के लड्डू- त्योहारों की बात हो और मिठाई न हो, ऐसा तो हो नहीं सकता। हर त्योहार पर विशेष पकवान बनाने व खाने की परंपरा प्राचीन काल से है। मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष रुप से तिल व गुड़ के पकवान बनाने व खाने की परंपरा है। तिल व गुड़ की गजक भी लोगों को खूब भाती है। मकर संक्रांति के दिन इसका सेवन करने के पीछे वैज्ञानिक आधार भी है। सर्दी के मौसम में जब शरीर को गर्मी की आवश्यकता होती है, तब तिल व गुड़ के व्यंजन यह काम बखूबी करते हैं। तिल में तेल की प्रचुरता रहती है, जिसका सेवन करने से शरीर के अंदर पर्याप्त मात्रा में तेल पहुंचता है और सर्दियों में त्वचा को शुष्क होने नहीं देता। इसी प्रकार गुड़ की तासीर गर्म होती है। तिल व गुड़ को मिलाकर जो व्यंजन बनाए जाते हैं, वह हमें सर्दी से बचाते है। यही कारण है कि मकर संक्रांति के अवसर पर तिल व गुड़ के व्यंजन प्रमुखता से खाए जाते हैं।

तिल है अनमोल- तिल में मोनो- सैचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग (दिल का दौरा) की संभावना को कम करता है। तिल में सेसमीन नाम का एन्टीआक्सिडेंट होता है, जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है। इसमें नियासिन नाम का विटामिन होता है, जो तनाव और अवसाद को कम करता है। तिल में जरुरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक, और सेलेनियम होता है, जो हृदय की मांसपेशियों को सुचारु रुप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है। तिल का तेल बच्चों की हड्डियों और मांसपेशियों को विकास व मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं। 100 ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। तिल में फोलिक एसिड होता है, जो गर्भवती महिला के विकास करने और उन्हें स्वस्थ रखने में मदद करता है। तिल में जिंक और कैल्शियम होता है जो अस्थि-सुषिरता (आस्टियोपोरोसिस) की संभावना को कम करने में मदद करता है। यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एंटी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है, जब यह मधुमेह विरोधी औषधि के साथ मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह रोगी के लिए यह मददगार होता है।

मकर संक्रांति को खिचड़ी- खिचड़ी भारत के हर घर में बनाई और खाई जाती है। इसे दाल और चावल को एक साथ उबाल कर बनाया जाता है, फिर घी, अचार, पापड़ और दही के साथ खाया जाता है। उड़द दाल में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के आलावा अच्छी खासी मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, कैलशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, अमीनो एसिड्स और पोटैशियम आदि पेाषण प्राप्त होते है। ताजी खिचड़ी को घी के साथ खाने पर उसमें माइक्रो-न्यू ट्रियन्ट्स, प्रोटीन और फैट मिलते हैं। इसमें सब्जियां मिला कर और भी हेल्दी बनाया जा सकता है। ग्लूटेन एलर्जी से पीड़ित वाले लोग भी इसे खा सकते हैं, यानी की जिन्हें गेहूं, राई और जौ खाने से एलर्जी हो जाती है, वे लोग इसे बिना डर के खा सकते हैं। यह शरीर से तीन दोषों-वात, पित्त और कफ को संतुलित कर देती है और आराम से पच जाती है। अगर पाचन तंत्र कमजोर है तो खिचड़ी में थोड़ा नींबू निचोड़ कर खाना चाहिए। 10-11 महीने के बच्चों का मेटाबालिज्म बहुत कमजोर होता है वे खाने को ठीक से हजम भी नहीं कर पाते, इसलिए उनके लिए खिचड़ी सबसे उत्तम है।

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