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13 सितम्बर 2016, पद्मा एकादशी
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जिन खोजा तिन पाइयां

यह एक आम बात है कि हम सब को  इस संसार में सभी भौतिक सुखों को प्राप्त करने की कामना है। सुखपूर्वक जीवन के

दायित्वों को पूर्ण कर मोक्ष की प्राप्ति अंतिम पड़ाव है लेकिन किसी को यह सब कुछ मिल जाता है और किसी को कड़ी मेहनत  के

बाद भी सफलता नहीं मिलती ऐसा क्यों होता है


यह एक आम बात है कि हम सब को  इस संसार में सभी भौतिक सुखों को प्राप्त करने की कामना है। सुखपूर्वक जीवन के दायित्वों को पूर्ण कर मोक्ष की प्राप्ति अंतिम पड़ाव है लेकिन किसी को यह सब कुछ मिल जाता है और किसी-किसी को कड़ी मेहनत  के बाद भी सफलता नहीं मिलती ऐसा क्यों होता है दर असल किसी भी कार्य में सफलता हासिल करने के लिए आद्यात्मिक शक्ति की जरुरत होती है और वो हमें प्राप्त होती है इस ब्रह्मांड की उर्जा से जिसको हम विशेष दिन और समय में किये जाने वाले अनुष्ठानों को विधि पूर्वक करके हासिल कर सकते है। पùा एकादशी का दिन यह सब हासिल करने में हमारी मदद करता है।

हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पùा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस वर्ष पùा एकादशी का व्रत 13 सितम्बर को रखा जाएगा। यह व्रत सब सिद्धियों को देने वाला और समस्त उपद्रवों को नष्ट करने वाला है। इसको करने से जीवन में सफलता प्राप्त होती है। इस शुभ दिन भगवान विष्णु और उनके वामन अवतार के रुप की पूजा की जाती है तथा पालकी में मूर्तियों को स्थापित कर शोभा यात्रा निकाली जाती है।

व्रत की विधि- व्रती को एकादशी के दिन स्नान करके भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर हाथ में जल एवं फूल लेकर संकल्प करें। इस दिन भगवान विष्णु तथा उनके वामन अवतार का धूप, तुलसी के पत्तों, दीप, नवैद्य व फूल आदि से पूजा की जाती है। इस दिन सात घड़ों को अलग-अलग अनाजों गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौं, चावल और मसूर से भरकर रक्खा जाता है। पùा एकादशी से एक दिन पहले दशमी के दिन गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौं, चावल तथा मसूर नहीं खानी चाहिए। स्थापित किए हुए घड़े के ऊपर भगवान विष्णु तथा वामन अवतार की मूर्ति रखकर पूजा करने का विधान है। पùा एकादशी की रात को भजन-कीर्तन या जागरण करना चाहिए। पùा पुराण के अनुसार व्रत द्वादशी के दिन पूजन कर ब्राह्मण को भोजन और दान करें। अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें।

 

It is very simple, that all of us choice to have realistic peace. To fulfill the responsibility of peaceful life and get moksh is the last stage, however, some humans get all these very easily without any difficulty where as some of them have to really work hard nevertheless couldn't reap achievement, why this takes place?  To achieve success in any work you require spiritual energy and this energy can be acquired only from the universe that is performed on a special day and time through anusthan in a right manner. “Padma ekadashi” is the day that enables us to acquire this energy. Padma Ekadashi Fast: According to Hindu religious book, Bhadrpad maas ke shukl pakash ki ekadashi ko “padma ekadashi” fast can be kept. Padma Ekadashi fast is on 13th September this year. This fast is the best from the other entire fast. If you keep this fast all your sins will be washed off. This fast gives you super natural power and destroys the evil. On this auspicious day worship of Lord Vishnu and its Vaman avatar is done, as well as their idol is kept on palki and sobha yatra is takenout. Procedure of Padma Ekadashi Fast:  On the ekadashi day vrati have to take bath and wear clean clothes. after then sit in front of Lord Vishnu taking pushp and jal in hand to take an oath. On this day, worship of Lord Vishnu and its vaman avatar is done through dhup, leaves of Tusli, flower or … , and deep. On the same day seven pots are filled with different – different foods and kept (like wheat, urad, moong, chana, jaw, chawal and masoor). One day before of Padma Ekadashi that is on the day of Dashmi you should not eat wheat, urad, moong, chana, jaw, chawal and masoor. The place where the pot is kept, keep the idol of Lord Vishnu and it Vaman Avatar on the pot and worship ritually. The fasting night of Padma Ekadashi either do jagaran or bhajans. According to padma puran, fasting day of dwadashi worship the lord and then give food and daan to bhramans . At last you can also break the fast and eat food.

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