Rahukaal Today/ 09 OCTOBER 2017 (Delhi)-15 OCTOBER 2017

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भाई के प्रति बहन का स्नेह
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भाई के प्रति बहन का स्नेह

भाई दूज के दिन बहने अपने घर में चैक पूर कर पूजा करेंगी और अपने भाई की लम्बी उम्र की कामना करेंगी इस पूजा का लाभ हाँसिल करने के लिये भाइयों को चाहिए कि आज वो अपनी बहन के घर जाकर भोजन अवश्य  ग्रहण करें और धन्यवाद स्वरुप बहन को भेट दें

 

 

 नौतिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए वैसे तो हमारे संस्कार ही काफी हैं लेकिन फिर भी इसे अतिरिक्त मजबूती देते हैं हमारे त्योहार। भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला पर्व है। जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। भाईदूज में हर बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य एवं खुशहाली की कामना करती है। इस अवसर पर भाई अपनी बहन को कुछ उपहार भी देता है। इस त्योहार के पीछे एक कहावत यह भी है कि यम देवता ने अपनी बहन यमी (यमुना) को इसी दिन दर्शन दिया था, जो बहुत समय से उससे मिलने के लिए व्याकुल थी। अपने घर में भाई यम के आगमन पर यमुना ने प्रफुल्लित मन से उसकी आवभगत की थी। यम ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया था  कि इस दिन यदि भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी मुक्ति हो जाएगी। इसी कारण इस दिन यमुना नदी में भाई-बहन के एक साथ स्नान करने का बड़ा महत्व है। इसके अलावा यमुना ने अपने भाई से यह भी वचन लिया कि जिस प्रकार आज के दिन उसका भाई यम उसको मिला है, उसी प्रकार हर भाई अपनी बहन से मिले उसके घर जाए। तभी से भाईदूज मनाने की परंपरा चली आ रही है। भैया दूज की पूजा में बहनें पीढियों पर चावल के घोल से चैक बनाती हैं। इस चैक पर भाई को बैठा कर उनके हाथों की पूजा करती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए यह मंत्र बोलती हैं ”गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढे“ इसी प्रकार कहीं-कहीं इस मंत्र के साथ भी हथेली की पूजा की जाती है। चैक के बगल में भाई के षत्रु के रुप में एक आकृति बनाई जाती है। जिसके मुंह पर बेर की डालो और उसके ऊपर दियाली रख कर बहने मूसल से सात बार प्रहार करती है। दिपाली फोडने के उपरान्त बेर की पत्तीयों को हाथ से तोडते हुये बोलती है भइया गये है, खेलन कूदन कंटवा न लागे भइया गये है पढने लिखने कंटवा न लागे। भइया गये है नैकरी करने कंटवा न लागे। कही-कही पर इस प्रकार भी बोलने की प्रथा है। ”सांप काटे, बाघ काटे, बिच्छू काटे जो काटे सो आज काटे“ इस तरह के शब्द इसलिए कहे जाते हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन अगर भयंकर पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे। पूजा के पश्चात् बहने भाई का मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन मिस्री खिलाती हैं। भारतीय में जितने भी पर्व त्योहार होते हैं वे कहीं न कहीं लोकमान्यताओं एवं पुराणों की धार्मिक  कथाओं से जुडे होते हैं। इस त्योहार की भी एक पौराणिक कथा है। संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चैमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है। इस सन्दर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की लम्बी आयु क लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने स्वीकार कर लिया है और चील जाकर बहनों का संदेश यमराज को सुनाएगा। यह त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है|

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To strengthen the moral values, our traditions and festivals  bear a special significance. Bhai Dooja is a festival that is celebrated on the dwitiya tithi of shukla paksh in the month of Kartika. It is also popularly known as Yama Dwitiya. All sisters do a tilak with akshat and roli wishing for a happy, bright and prosperpous future of their brothers. Brothers also offer some auspicious gifts to their sisters. The festival falls after two days of Diwali. In this festival, brothers reveal their affection to their sisters. There is also a belief that the God of death ' The Yama' offered darshan to his sister Yami (Yamuna) on this day. She was desperate to see his brother from a long time. When her brother visited his sisters place, she became very enthusiastic and welcomed him. Yama granted her a wish that if  brothers and sisters take bath in the river Yamuna together then they will be free from the worldly affairs and get moksh. For this reason also the day is very important. Yamuna also took a vachan from Yama that as he has visited her house, all the brothers on the earth should visit their sisters house. Since then the tradition of Bhai Dooja is being followed religiously. On this day, the sisters decorate the wooden platform with the solution of rice and after it ddries, they make him sit on it and rever his hands. They apply vermillion on their brother's both hands and put pumpkin's flowers, beetle, supari and some money and leave water slowly chanting following mantra- Ganga pooje Yamuna ko Yami pujae Yamraj ko, Subhadra pujae Krishna ko, Ganga Yamuna neer bahae, merae bhai ki aayu badhae”. At some places, hands of brothers are also revered with this mantra. The mnatra chanted is- Saap katae, bagh kaate jo katae so aaj kaatae”. These words are said because it is believed that even if any dangerous animal attacks her brother, Yamraj cant take the life of her brother. After the reverence, the sisters offer sweets, mishri  and butter to their brothers. In Indian traditions, almost all the festivals are assocaited with one or the other religious beliefs. Each festival has many interesting mythological stories behind it. It is believed that if one celebrates the festival with same strong and deep belief, the results revealed will be optimistic and favourable. This festival of Bhai Dooja is also celebrated for the same reason. The story behind it reveals that if sisters wish for the well being of their brothers from the core of their heart, no-one, not even Yama can stop from granting the wish. On the evening, the sisters light four sided deepak and keep it outside. If one can see kite flying high in the sky, it is considered very auspicious. It is believed that whatever wish sisters are making for their brothers has been fulfilled by the diety and the kite who is the messanger of Yama has deliever the message to the sister. The pious festival strengthens the bond between brothers and the sisters . Hence, the festival should be celebrated with complete faith.

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