Rahukaal Today/ 17 March 2017 (Delhi)-23 March 2017

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09 सितम्बर 2016, माता महालक्ष्मी व्रत
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नीके दिन जब आइहैं, बनत न लगिहैं देर

जब एक हुआ तो दस होते दस हुए तो सौ की इच्छा है

सौ पाकर भी यह सोच हुआ की सहस्त्र हों तो अच्छा है

 


 

 

बस यही हाल है हम सब का जिसके पास जितना है उससे और अधिक की लालसा बनी रहती है हम इस को अच्छा या बुरा तो नहीं कह सकते

क्योकि शायद यही प्रकृति का नियम भी है। तो बस हम अपना अनुभव आप के साथ साझा कर रहे है ताकि आप भी अपनी दौड़ में दूर तक

सफलता के साथ दौड़ सकें मानव का जन्म मिला है कर्म तो करना ही होगा। यह हमारा दावा है की माता महालक्ष्मी की इस साधना से आप

सब को चमत्कारी लाभ हासिल हांेगे

माता महालक्ष्मी व्रत का प्रारम्भ भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारम्भ  होकर अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक चलता है। इन सोलह दिनों में लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। इस व्रत के करने से धन धान्य की वृद्धि होती है और सुख सम्पत्ति आती है। इस साल माता महालक्ष्मी का यह व्रत 9 सितम्बर, राधा अष्टमी के दिन से प्रारम्भ होगा। सबसे पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। और मन में प्रार्थना की जाती है की माता लक्ष्मी हम अपना व्रत पूरे विधि विधान से पूरा करेंगे, मुझ पर कृपा करियेगा की मेरा व्रत बिना किसी विघ्न के पूरा हो।

सर्वप्रथम व्रत करने वाले को लाल रंग का रेशमी धागा जिसमे 16 गांठे लगी हो अपनी कलाई (स्त्रियों को बायीं कलाई और पुरुषों को दाहिने) में बांध लेना चाहिए। व्रत के पूरे 16 दिन सुबह और शाम को दूध की बर्फी का भोग मां लक्ष्मी को लगाना चाहिए। पहले दिन ही पूजा के पश्चात यह धागा उतारकर मां लक्ष्मी के चरणों में रख देना चाहिए।

महालक्ष्मी पूजन की सामग्री- लक्ष्मी जी की फोटो जिसके दोनों तरफ हांथी हो जिनकी सूड़ ऊपर की ओर हो, कलश (ताम्बे, पीतल या मिटटी का) आम पल्लव, सूखा नारियल, सफेद रेशमी वस्त्र, लाल रेशमी धागा, गंगा जल, हल्दी, साबुत अक्षत, सुपारी, पान, दूर्वा, कलावा, लाल चुनरी आदि।

कलश- पूजन में ताबें का कलश शुभ माना जाता है। अगर ताम्बे का कलश न मिल पाए तो मिट्टी के कलश का भी उपयोग किया जा सकता है कलश पर वरुण देव आकर विराजमान होते हैं। कलश में डालने के लिए गंगा जल, सुपारी, आम का पल्लव, दूर्वा, नारियल, पैसा, कलश में तांबे के पैसे डालना शुभ है।

सबसे पहले पूजा किए जाने वाले स्थान को साफ कर लें। अब वहां एक पाटा रखें जिस पर हल्दी और कुमकुम से कोई शुभ मांगलिक चिह्न बनाएं। इस पर सफेद रेशमी रंग का कपड़ा बिछाएं अब सबसे पहले श्रीगणेश जी को फिर कलश स्थापित करें कलश, देव मूर्ति के दाहिनी ओर स्थापित करना चाहिए। कलश की स्थापना बालू में जौ डालकर करें और कलश सथापना के समय इस मंत्र का जप करें-

कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाषिृतः।

मूलेतस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मात्र गणा स्मृताः।

कुक्षौतु सागरा सर्वे सप्तद्विपा वसुंधरा,

ऋग्वेदो यजुर्वेदो सामगानां अथर्वणाः।

अङेश्च सहितासर्वे कलशन्तु समाश्रिताः।

अर्थ- कलश के मुख में विष्णु, कलश के कंठ यानी गले में शिव और कलश के मूल यानी की जड़ में ब्रह्मा ये तीनों शक्ति इस ब्रह्मांड रुपी कलश में विद्यमान होती हैं। कलश के बीच वाले भाग में पूजनीय मातृकाएं उपस्थित हैं। समुद्र, सातों द्वीप, ब्रह्माण्ड के संविधान कहे जाने वाले चारों वेदों ने (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) इस कलश में स्थान लिए हैं। ये सभी मेरा प्रणाम स्वीकार करें और जपे-

वरुण देव को नमस्कार करें।

ऊँ अपां पतये वरुणाय नमः।

अर्थ- जलदेवता वरुणदेव को नमस्कार है।

इन मंत्रों के साथ कलश पूजन करें। कलश पर गंध, पुष्प्प और चावल अर्पित करें। इसके बाद एक पाटे पर सफेद रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी की फोटो जिसके दोनों तरफ ऊपर की ओर सूड़ किये हुए हांथी हो अगर फोटो न मिल पाए तो फोटो के दोनों तरफ मिटटी के दो हांथी स्थापित कर दें।

पूजन विधि- इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता केवल फलाहार और दूध आदि का सेवन किया जाता है। व्रत संकल्प के समय इस मंत्र का जाप करें-

करिष्येहं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा।

तदविध्नेन में यातु समप्तिं स्वत्प्रसादतः ।।

इसके बाद मां लक्ष्मी को लाल रंग की चुनरी ओढ़ाये, फिर उनका श्रंृगार करें उसके बाद तिलक लगाकर माला अर्पित करंे फिर फल अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल तथा भोग लगायें व्रत पूरा हो जाने पर वस्त्र से एक मंडप बनाकर उसमें लक्ष्मी जी की प्रतिमा रक्खी जाती है। लक्ष्मी जी को पंचामृत से स्नान कराकर उसका सोलह प्रकार से पूजन किया जाता है। इसके पश्चात ब्रह्माणों को भोजन कराने के बाद दान-दक्षिणा दी जाती है। इस प्रकार यह व्रत पूरा होता है। जो इस व्रत को करता है उसे अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। सोलहवें दिन इस व्रत का उद्धयापन किया जाता है। जो व्यक्ति किसी कारण से इस व्रत को 16 दिनों तक न कर पायें, वह तीन दिन तक भी इस व्रत को कर सकता है। प्रथम पूर्णिमा और सोलहवा। लगातार सोलह वर्षों तक करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं व्रत की प्रचलित कथा है कि प्राचीन समय में एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह नियमित रुप से श्री विष्णु का पूजन करता था। उसकी पूजा-भक्ति से प्रसन्न होकर उसे भगवान श्री विष्णु ने दर्शन दिये और ब्राह्मण से अपनी मनोकामना मांगने के लिये कहा, ब्राह्मण ने लक्ष्मी जी का निवास अपने घर में होने की इच्छा जाहिर की। यह सुनकर श्री विष्णु जी ने लक्ष्मी जी की प्राप्ति का मार्ग ब्राह्मण को बता दिया] मंदिर के सामने एक स्त्री आती है] जो यहां आकर उपले थापती है] तुम उसे अपने घर आने का आमंत्रण देना। वह स्त्री ही देवी लक्ष्मी है। देवी लक्ष्मी जी के तुम्हारे घर आने के बाद तुम्हारा घर धन और धान्य से भर जायेगा। यह कहकर श्री विष्णु जी चले गयें। अगले दिन वह सुबह चार बजे ही मंदिर के सामने बैठ गया। लक्ष्मी जी उपले थापने के लिये आईं, तो ब्राह्मण ने उनसे अपने घर आने का निवेदन किया। ब्राह्मण की बात सुनकर लक्ष्मी जी समझ गई, कि यह सब विष्णु जी के कहने से हुआ है। लक्ष्मी जी ने ब्राह्मण से कहा की तुम महालक्ष्मी व्रत करो, 16 दिनों तक व्रत करने और सोलहवें दिन रात्रि को चन्द्रमा को अर्ध देने से तुम्हारा मनोरथ पूरा होगा। ब्राह्मण ने देवी के कहे अनुसार व्रत और पूजन किया और देवी को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके तीन बार-

"हे माता लक्ष्मी मेरे घर आजाओ"

"हे माता लक्ष्मी मेरे घर आजाओ"

"हे माता लक्ष्मी मेरे घर आजाओ" पुकारा और तब लक्ष्मी जी ने अपना वचन पूरा किया। तभी से यह व्रत विधि-पूर्वक पूरी श्रद्धा से किया जाता है।

उद्यापन विधि- व्रत के उद्यापन वाले दिन दो नए सूप] 16 नयी चीजे जिसमे श्रृंगार वस्त्र आभूषण] मिठाई] फल मेवा हो (सभी चीजो की संख्या 16 होनी चाहिये) सारे सामान को एक सूप में रखकर दूसरे सूप से ढक दें ध्यान रहे की एक बार ढकने के बाद इसे दोबारा खोला नहीं जाना चाहिये। व्रत के आखिरी दिन रात में खीर, पूड़ी सब्जी रायता चटनी भोजन में बनाना चाहिए। भोजन में लहसन प्याज का उपयोग नहीं करना चाहिए पूजा के बाद रात में चन्द्रमा को अर्घ देने के बाद चांदी की थाली में भोजन को रखकर लक्ष्मी जी के सामने रखना चाहिए। लक्ष्मी जी के लिए सफेद रेशमी वस्त्र का आसान लगाये। इस बात का ध्यान रहे की लक्ष्मी जी का मुह उत्तर की ओर और व्रती का पूरब की ओर हो। भोग लगाने के बाद दुबारा सभी चीजो को थाली में डालकर वही रख दें और वही पास में ही बैठकर भोजन करें व्रत के दूसरे दिन लक्ष्मी जी को लगाये गए भोग को गाय को दे, और चढ़ाये गए सामान को व्रत करने वालें को दें|

 

 

Good Time Will Come Soon!

When people have one, they look for ten. When they have ten, they wish for hundred. However, when they have received hundred, then their thinking expands and they desire for thousands.

 


We all have same thinking. Whatever we have we never get satisfied with it. We always crave for more and more. We can't call this process as good or bad as this is the nature's rule.  Here we are sharing our experiences with you so that you can understand your own welfare and identify your own limits. We also hope that you gain eminent heights of success. Being human we to do karma but this particular worship of Mata Mahalaxmi shall give you tremendous development in life.

 The fast of Mahalakshmi begins from Bhadrapad month on the eigthtithi of Shukla paksha. It lasts till the eighth tithi of Krishna paksh in the Ashwin month. These sixteen days are considered very auspicious for gaining wealth, prosperity and happiness. This year the fast of mataLaksmi will start from 9th September. It will begin from the day of Radha Ashtami. First of all, the devotees should get free from their daily routines take bath and wear clean clothes. Followed by that they should take sankalp for keeping this fast. Beside that they should appeal MataLaxmi to shower her blessings while the devotee keeps the fast with complete faith and by following proper rituals. The devotee prays goddess Laxmi that their fast stays hurdle free. First of all, the devotee who is keeping fast should tie a red silken thread which has 16 knots in it on his wrist. Ladies should tie it on their left hand while the male members should tie it on their right hand. During the tenure of 16 days, the devotee should offer pure milk sweets to goddess Laxmi. On the first day, after the devotee has performed the prayer, he should take out the thread from her wrist and keep it in the feet of the goddess. The Materials required for the MahaLaxmiPoojan: Buy an image of MahaLaxmi that has elephants on both the sides. Their trunk should be uplifted. Arrange a kalash( made up of copper, brass or of mud), few mango leaves, coconut, white silken cloth, red silken thread, ganga jal,turmeric, akshat (rice should not be broken),supari, beetel leaves, durva (pious grass) and red chunari. Kalash: The copper kalash is considered very auspicious for Pooja. If not possible, arrange mud kalash. It is believed that God Varun takes a seat here. Gangajal, supari, mango leaves, durva, coconut, money should be put into the kalash. It is auspicious to put some coin inside the kalash. First of all, clean the place of deity. Now keep a broad platform here (pata in hindi). Now make some auspicious symbol with turmeric or kumkum. Now spread white coloured silken cloth on this platform. You should put the idol of Shri Ganesh on it in the beginning. Now place kalash on it. You should place kalash on the right hand side of the Ganesh idol. You should do the sthapana of kalash by adding sand and barley in it. You should chant this mantra –

Kalashasya Mukhe Vishnu Kanthe Rudra Samashrita|

Muletasya Sthito Brahma Madhye Matra Gara Smritah|

Kukshotu Sagra Sarve Saptadveepa Vasundhara|

Rigvedo Yajurvedo Saamganam Athvarnah|

Angeshch Sahitasarve Kalshantu Samashritah|

Meaning: The opening of Kalsh has Shri Vishnu. The neck region of Kalash has Shri Shiva and the root of Kalshhas Shri Brahma. It is believed that all these three powers are present in the kalash. The mid region of kalash has all the revered and auspicious materials. The ocean, all the seven continents and all the four vedas which are considered as the constitution of Brahmand(Rigveda, Yajurveda, saamveda and Atharveda) has taken seat in this kalasha.  The devotee should offer his reverence and worship. They should chant-

Varun Dev Ko Namaskarr Karein|

Om Apam Pataye Varunay Namah|

Meaning: I offer my reverence toJaldevtaVarundevta. You should chant the mantra while sthapana of kalash. Offer scented agarbattis, flower and rice(akshat) to the kalash. Thereafter, spread white coloured silken thread on the platform and place the photo of Mahalaxmi with two elephantson both the sides that have uplifted trunk. If you can't get any such photo, then keep two elephants made up of mud on both the sides of Mahalaxmi.

Worship method: The individual should not take cereals in any form. Fruits and milk can be taken. While you take sankalp, chant following mantra-

Karishyeham Mahalaxmi Vratme Twatparayana

Tadvighnen me Yatu Samapteem Swatprasaadatah

Thereafter offer red coloured chunni, cosmetics and tilak to goddess Laxmi. Offer flowers or garland along with fruits, akshat, durva, red coloured thread, supari and coconut. After you successfully accomplish your fast, prepare a mandap with the red coloured cloth and keep the idol or image of Mahalaxmi in the mandap. Followed by it, you should bath goddess Laxmi with panchmrit and worship via sixteen means. Offer food to brahmins and donate clothes and money to them. Once you follow these steps religiously, you complete your fast methodically. All those who perform this fast get blessed with Ashta Laxmi. The udyapan is done on the 16th day. All those who cannot keep this fast for 16 days for some reasons can keep the fast for three days. First fast, the day of Purnima and 16th fast are those three significant days. If the individual keeps the fast continuously for 16 years, gets blessed with desirable and auspicious results.

The story of MahaLaxmi- In the ancient times, there lived a poor Brahmin in the village. He used to revere lord Vishnu on daily basis with full faith. Lord Vishnu became happy with his worship and emerged in front of him and asked Brahmin as in what he longs for. Brahmin said that I want goddess Laxmi to make her dwelling at my place. Vishnuji told him the process to get his wish fulfilled. A woman used to visit the temple on daily basis. She used to prepare 'upale' via cowdung. Lord Vishnu suggested the Brahmin to invite the lady to his house. He told him that the lady is Mahalaxmi. Vishnuji said- “After she will come to your house, you will have wealth and prosperity at your home”.  After this, lord Vishnu went away. Next day, he sat outside the temple and started waiting for the goddess. When goddess Laxmi came to prepare 'upale', Brahmin invited her to his house. After she heard the Brahmin, she understood that Vishnuji is behind all these. Goddess Laxmi said- You keep the fast of Mahalaxmi. Keep this fast for 16 days and on the 16th day, when you will offer ardhya to moon, your fast will get accomplished. Your all wishes will be fulfilled. Brahmin kept the fast and worshipped the goddess and invited goddess Laxmi three times facing towards the north direction chanting following mantra-

'Oh, goddess Laxmi, please come to my place”

'Oh, goddess Laxmi, please come to my place”

'Oh, goddess Laxmi, please come to my place”

After this, goddess completed her promise. Thereafter, this fast is kept with complete faith and devotion by all the devotees to get wealth and prosperity. Udyapan (Completion) procedure: On the udyapan day, the individual should buy 2 new 'soops', 16 new things which includes cosmetics items, jewellery, sweets, fruits, dryfruits, etc. All these items should be kept in the soopand covered with another soup or basket. Ensure that you do not open this after you cover it once. On the last day of the fast, the devotee should prepare kheer, pooris, vegetable, raita, chutney etc.You should not use garlic or onion while preparing the food. After the Pooja, the individual should offer ardhya to the moon and keep the food in the silver plate and offer it to goddess Laxmi. You should spread white coloured silken cloth for goddess Laxmi to take rest. Ensure that the face of goddess Laxmi is towards the North direction and the devotees face is towards East direction. After you have offered the 'bhog' you should keep all the items in the plate and keep it there only. You should sit nearby and take your food also. On the next day of keeping the fast, you should offer the bhog that was provided to goddess Laxmi to the cow. Furthermore, all the elements that you have offered like jewellery, cosmetics etc should be given to the brahmins.

 

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