Rahukaal Today/ 09 AUGUST 2017 (Delhi)-15 AUGUST 2017

  • Mon
  • Tue
  • Wed
  • Thu
  • Fri
  • Sat
  • Sun
Rahukaal Today
7:28:07 - 9:07:15

8:31:22 - 9:51:45
Rahukaal Today
15:43:00 - 17:22:00

7:14:52 - 8:58:45
Rahukaal Today
12:26:00 - 14:06:00

12:19:30 - 13:57:22
Rahukaal Today
14:05:22 - 15:45:15

13:57:37 - 15:35:45
Rahukaal Today
10:46:15 - 12:26:00

10:42:30 - 12:15:00
Rahukaal Today
9:06:15 - 10:45:52

9:10:30 - 10:42:45
Rahukaal Today
17:23:37 - 19:03:00

16:50:00 - 18:22:00
03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी
There are no translations available.

सूर्य की उपासना बनायें निरोगी

राहु काल-11:13 से 12:35 (दिल्ली से सूर्योदय के आधार पर) सूर्य सम्बन्धी कोई पूजा राहु काल के दौरान नहीं करनी चाहिए ।

3 फरवरी को सूर्य को अर्घ देकर अपने गुरु को अचला गिफ्ट करें और गेहूं-गुड़ से बना गुडधनियां ब्राह्मण को दान करें व स्वयं भी प्रसाद रुप में ग्रहण करें तो आप ऊर्जावान बने रहेगें । इससे साथ ही आपकी सन्तान की वृद्धि के साथ-साथ उसे तीव्र बुद्धि प्राप्त होगी...

रथ सप्तमी प्रति वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है । इस साल रथ सप्तमी का व्रत 3 फरवरी को मनाया जायेगा । रथ सप्तमी के अलावा इसे अचला सप्तमी, मन्वदि सप्तमी, संतान सप्तमी, विधान सप्तमी, आरोग्य सप्तमी और चन्द्रमागा सप्तमी के नामों से भी जाना जाता है । अगर रथ सप्तमी रविवार के दिन पड़े तो इसे अचला भानू सप्तमी भी कहा जाता है। रथ सप्तमी विशेषतौर पर दक्षिण और पश्चिमी भारत में मनायी जाती है । वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इसी दिन से सूर्य ने पूरे संसार में अपना प्रकाश फैलाना आरंभ किया था और सौर ऊर्जा बननी शुरु हुई थी । हर साल इस दिन से हमारा देश अंधेरे से प्रकाश में प्रवेश करता है । इसिलिए इस दिन को सूर्य जयंती के रुप में भी मनाया जाता है । एक साल में सूर्य दो बार अपनी दिशा बदलता है । एक बार उत्तरायण दिशा और दूसरी बार दक्षिणायन । माघ महीने से सूर्य उत्तरायण दिशा, यानि दक्षिण से उत्तर की ओर अपनी दिशा परिवर्तित कर लेता है । सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर परिवर्तित होने की वजह से ही ऋतु-चक्र में भी परिवर्तन होता है । माघ माह में सर्द ऋतु समाप्त होती है और नई ऋतु बसंत की शुरुआत होती है । पुराणों में भी इसका जिक्र है । पुराणों के अनुसार, सूर्य अपने सात घोड़ों वाले रथ के साथ उत्तरी गोलार्द्ध, यानि दक्षिण से उत्तर की तरफ अपनी दिशा मोड़ते हैं । सूर्य के सात घोड़ों का प्रतीक सात रंगों, यानि इंद्रधनुष को माना जाता है । खगोलशास्त्र के अनुसार, सारे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं । सूर्य सभी ग्रहों का राजा माना जाता है । क्योंकि सूर्य सभी ग्रहों के मध्य स्थित होता है और सूर्य ही सभी ग्रहों की ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत है । पृथ्वी पर भी ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत सूर्य ही है । हमारी जिंदगी का हर दिन सूर्य की रोशनी के साथ ही शुरु होता है । इसलिए सदियों से लोग सूर्य भगवान को पूजते आ रहे हैं । यहां तक कि समय-चक्र भी सूर्य की खगोलीय स्थिति पर निर्भर करता है ।

स्नान का वैज्ञानिक आधार

कहते हैं कि रथ सप्तमी से एक दिन पहले यानि पष्ठी को व्रत करना चाहिए और अगले दिन रथ सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके सूर्य भगवान को जल अर्पण करना चाहिए । इस बार स्नान का शुभ समय सुबह 5 बजकर 31 मिनट से लेकर 7 बजकर 10 मिनट तक है । वैसे तो पूरा माघ माह ही नदियों में स्नान का महीना है, लेकिन रथ सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए । स्नान करने से पहले आक के पौधे के सात पत्ते अपने सिर पर रखने चाहिए और स्नान करने से पहले हटा लेना चाहिए । ध्यान रहे कि पत्तियों का दूध आंख में कतई न लगने पाये । आस्था के साथ-साथ आक के पत्तों के कई औषधिय गुण भी हैं । आक का स्पर्श स्किन की बीमारियों, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याओं के लिए भी कारगर है । इस दिन सूर्य के सामने खड़े होकर जल चढ़ाने से सूर्य का तेज सीधे हमारे शरीर पर पड़ता है । क्योंकि इस दिन सूर्य की किरणें हमारे शरीर के साथ रासायनिक प्रतिक्रियाएं करती हैं । जिससे हमारे शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है और मन को शांति मिलती है । वर्तमान में भी सूर्य की किरणों पर आधारित सूर्य चिकित्सा पद्धति का उपयोग कई बीमारियों से निजात पाने के लिए किया जाता है । सूर्य की रोशनी से ऐसे कई हानिकारक कीटाणु खत्म हो जाते हैं, जिन्हें आम तौर पर देखा नहीं जा सकता । सूर्य के उत्तरायण होने से कायिक, मानसिक तथा प्राकृतिक रुप से हम पर सकारत्मक प्रभाव पड़ता है । सूर्य का उत्तरायण होना उत्साह और ऊर्जा के संचारित होने का काल है।

लाल रंग का महत्व

शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने से जाने-अनजाने किए पापों से छुटकारा मिल जाता है । इससे शरीर से, मन से, वाणी से, वर्तमान जन्म के और पिछले जन्म के पापों से छुटकारा मिलता है । इस दिन लाल रंग का बहुत महत्व होता है । सूर्य और मंगल ग्रह लाल रंग के स्वामी हैं । लाल रंग कामावेग, संवेदनाओं, इच्छाओं, भावनाओं और क्रांति का प्रतीक है । सामुद्रिकशास्त्र के अनुसार, जिन लोगों को यह रंग पसंद होता है, वे विशाल ह्दय के स्वामी और उदार व्यक्तित्व गुणों वाले होते हैं । मंद बुद्धि और हीन भावना से ग्रसित लोगों के लिए तो लाल रंग वरदान के समान है । अगर संभव हो तो इस दिन दान भी लाल रंग की चीजों का ही करना चाहिए । इस दिन गुरु को लाल रंग का अचला, यानि गले में डालने वाला कपड़ा दान करना चाहिए । अचला दान करने के कारण ही इस सप्तमी को अचला सप्तमी के नाम से जाना जाता है । शास्त्रों के अनुसार, इस दिन स्नान के बाद गेंहू और गुड़ से बना गुड़ धनिया खाना चाहिए और ब्राह्मणों को भी खिलाना चाहिए । क्योंकि इसका रंग भी लाल होता है और लाल रंग ऊर्जा का प्रतीक होता है । जिससे हमारे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है । साथ ही आज के दिन नमक का त्याग भी करना चाहिए।

Share this post

Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in Delicious Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in Digg Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in FaceBook Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in Google Bookmarks Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in Stumbleupon Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in Technorati Submit 03 फरवरी 2017, रथ सप्तमी   in Twitter