Rahukaal Today/ 09 OCTOBER 2017 (Delhi)-15 OCTOBER 2017

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नवरात्रि प्रारम्भ, 1अक्टूबर 2016
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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।

 

नवरात्रि में माता दुर्गा के नौ रुपों की आराधना की जाती है। रदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होकर नवमी तक पूरे देश मे धूम-धाम से मनायी जाती है। बुद्धिजीवियों को पुनीत यज्ञों के लिए, रक्षकों को भूमिपालन के लिए, व्यवसाइयों को धन के लिए, नौकरी पेशा लोगो को पुत्र और सुख के लिए, नारियों को सौभाग्य प्राप्ति के लिए यह व्रत सम्पादित किया गया है। दुर्गा पूजा का पर्व सभी लोगों द्वारा किया जा सकता है अगर व्यक्ति 9 दिनो तक इस व्रत को न कर पाये तो वह आश्विन शुक्ल सप्तमी से इस व्रत का प्रारम्भ कर तीन दिनांे तक कर सकता है। इससे धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष पुरुषार्थों की भी प्राप्ति होती है। नवरात्र के नौ दिनों में आदिशक्ति की अलग-अलग रुपों में पूजा की जाती है।

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघण्टा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।

ध्वजारोपण- शारदीय नवरात्र के पहले दिन घर पर एक ध्वजा लगानी चाहिये ध्वजा की लम्बाई चैड़ाई गृह स्वामी के हाथ से सवा 2 हाथ लंबी और सवा 2 हाथ चैड़ी होनी चाहिये यानि सवा 2 हाथ लंबे और सवा 2 हाथ चैड़े एक कपड़े को लेकर बीच से उसे तिर्यक रेखा से काटकर तिकोनी ध्वजा बनानी चाहिये। ध्वजा में स्वस्तिक या कोई अन्य शुभ चिन्ह भी बना सकते हैं। ध्वजा के लिए गैरिक रंग यानि नारंगी रंग अच्छा माना गया है। इस प्रकार शारदीय नवरात्र के पहले दिन अपने घर पर ध्वजा फहराने से मनुष्य को सर्वत्र विजय मिलती है। मुकदमे में भी जीत होती है और समाज में सम्मान जनक स्थान प्राप्त होता है। लिहाजा शारदीय नवरात्र के पहले दिन घर पर ध्वजा जरुर लगानी चाहिए। ध्वजा के बीच मे स्वस्तिक, मछली, एक ओंकार इत्यादि के चित्र या एक सादी ध्वजा लगाएं।

कलश स्थापना- किसी भी पूजा में सर्वप्रथम कलश स्थापना का महत्व है। कलश को भगवान गणेश का रुप माना जाता है। सामग्री-मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, गंगा जल, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश, मौली, साबुत सुपारी, सिक्के, अशोक या आम के पत्ते, मिट्टी का ढक्कन कलश ढकने के लिए, साबुत चावल, एक नारियल पानी वाला लाल कपड़ा या चुनरी और फूल से बनी हुई माला।

स्थापना- सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके लकड़ी का पटरा रखकर उसके ऊपर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश जी का स्मरण करते हुए कपड़े पर थोड़ा-थोड़ा चावल रखना चाहिए फिर जौ को मिट्टी के पात्र मे मिट्टी डालकर बोना चाहिए और जल से भरे कलश पर ऊँ और स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर उस पर स्थापित कर कलश में सुपारी, सिक्का डालकर उसके मुख पर रक्षा सूत्र बांधकर आम या अशोक के पत्ते रख ढक्कन से कलश के मुख को ढंक कर उसमे चावल भर देना चाहिये अब नारियल को चुनरी में लपेटकर देवताओं का आवाहन करते हुये ढक्कन के ऊपर रखकर दीप जलाकर कलश की पूजा मिठाइयां और फूल चढ़ाकर करें फिर लकड़ी के पाटे पर लाल आसन बिछा कर उस पर माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और नौ दिन तक इसी प्रकार स्थापित रहने दें और प्रतिदिन सुबह शाम दीपक जलाये व आरती करें माँ का भोग लगायें इलाइची, लौंग, फल, मिठाई का भोग लगाना चाहिए। लौंग का जोड़ा माँ को अति प्रिय है। लौंग फूलदार ही चढानी चाहिएं। यदि सम्भव हो सके तो नौ दिन अखण्ड ज्योति जलायें ये ज्योति देशी घी की या फिर तिल के तेल से भी जला सकते है।

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