Rahukaal Today/ 15 June 2017 (Delhi)-21 June 2017

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - 08 मार्च 2017
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एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान


सौम्या मिश्रा

‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के मौके पर हम एक ऐसी युवा महिला की चर्चा कर रहे हैं जिन्होंने छोटी-सी उम्र में ही बड़ी उपलब्धियां हासिल की है । समाज में महिलाओं के नाम को ऊंचाई तक पहुंचाने वाली शख्सियतों में से एक आर. जे सौम्या मिश्रा भी हैं । सौम्या मिश्रा ने छोटी-सी उम्र से ही अपने मुकाम को पाने के लिए कड़ी और लगातार मेहनत की है । इन्होंने एम आईटी पुणे से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलिकॉम्यूनिकेशन में इंजिनियरिंग करने के बाद एक लेक्चरर के रूप में काम किया । इसके कुछ समय बाद ही दुनिया को एक अलग नजरिये से देखने के लिए ये टोरेंटो(कनाडा) चली गयी । 2011 में टोरेंटो जाते समय ये अपने साथ सिर्फ दो सूट केस और ढेर सारा आत्मविश्वास लेकर गयी थी । लेकिन आज सौम्या मिश्रा एक ब्रांड हैं । ये टोरेंटों में एक अच्छी टीवी होस्ट और पॉपुलर आर. जे के काम से मशहूर हैं । इन्होंने कनाडा में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए काफी काम किया है, जिसके लिये इन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है । इनके रेडियो चौनल ‘रेडियो ढिशूम’ पर काफी सारे प्रोग्राम हिंदी में सुनने को मिलते हैं । सौम्या मिश्रा का मानना है कि  बूंद-बूंद से ही सागर बनता है ।


हमारे शास्त्रों में कहा गया है ‘यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवताः’ अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं । ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता माना जाता है और उनके बाद अगर कोई इस सृष्टि का विस्तार करने में सहायक है तो वह है नारी । उसी नारी के मान-सम्मान में पूरे विश्व में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। 1910 में कोपेहेगन में विश्व के लोकतांत्रिक समाजवादी दलों के समूह ‘अंतरराष्ट्रीय समाजवादी’ की मीटिंग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का फैसला लिया गया था, तभी से यह दिवस पूरे विश्व में 8 मार्च को मनाया जाता है । यह दिन हमें महिलाओं के त्याग, उनके समाज में सहयोग और उनकी उपलब्धियों की याद दिलाता है । यह दिन हमें एक बार फिर नए सिरे से नारी शक्ति को समझने, उसकी क्षमता को जानने का मौका देता है। नारी एक ऐसा भंडार है जिसे जितना अधिक समझा जाये, उतना ही कम है । आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं । पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर महिलाएं आगे बढ़ रही हैं और कहीं-कहीं तो उन से भी दो कदम आगे हैं । खेल, विज्ञान, शिक्षा, नौकरी, बिजनेस, पायलेट, प्रशासनिक सेवाओं, हर जगह महिलाएं अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं । ऐसा कोई क्षेत्र, कोई मुकाम नहीं है जिस तक महिलाएं ना पहुंची हो या पहुंचने की कोशिश ना कर रही हो, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए महिलाओं ने समय-समय पर अनगिनत परीक्षाएं भी दी हैं । हर बार एक नई परेशानी, एक नये आंदोलन से जूझना पड़ा है । चाहे फिर समाज से जूझना हो, घर वालों से या फिर ससुराल वालों से । कागजों में तो महिलाओं को बहुत से अधिकार दिए गए हैं, लेकिन असलियत में उन अधिकारों को पाने के लिए महिलाओं को हमेशा से कड़ी मेहनत करनी पड़ी है । समाज में महिलाओं के प्रति कुरीतियां दहेज प्रथा, सती प्रथा, पर्दा प्रथा या बाल विवाह, किसी का भी उदाहरण ले लीजिये, सबके लिए एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद ही महिलाओं को समाज में सही अधिकार मिल पाये हैं ।

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On the event of this International Women's day we are giving a tribute to a young woman who has achieved a lot for her age. Somya Mishra has been a dreamer and worked relentlessly towards her dream. She completed her engineering in Electronics and Telecommunications from MIT, Pune and worked a Lecturer. Then she moved to Toronto, Canada to explore the other side of the world. She left for Toronto with just two suitcases and a lot of Motivation in 2011. Today she is a Popular TV host and RJ in Toronto, Canada. She has been honoured several times for her contribution in Hindi in Canada. Somya is a true believer that every drop in the ocean makes it bigger. Our best wishes to her and every other woman who has worked hard towards their dreams.

It is well said in our shastra- “Yasya pujyantae naaryastu tatr ramante devtaah”It means Gods and Goddesses dwell on the place where women are worshipped. Bramhaji is considered as the creator of the universe. After him, if anyone exists and is accountable and helpful in expanding the universe, she is the women. To respect the women of the society, we celebrate “International Women's Day” on 8th of March every year. On 1910, in Kopehegan, the democratic and socialist groups decided to celebrate the International Women's Day. They decided to do that in the meeting of International Socialism. From that time, this day is celebrated as “International Women's Day on 8th March across the entire world.  The day teaches us about the sacrifice of the women, their cooperation and their contribution towards the society. It also reminds us about their accomplishments. This day once more gives us an opportunity to understand the powers and the abilities of a woman. A woman is a storehouse that more you understand; you would like to know more about her. In today's world, women are excelling in each and every field. They are ahead in all the spheres. They are standing and walking equally with men and surprisingly they are excelling from them too. Whatever is the field; sports, education, occupations, business, pilot and administrative services, their presence can be observed on each and every place. There are almost all the designations and positions where women have reached. But the fact is that they have to strive hard to reach on all those unbelievable post and for that they have to pass through countless examinations. They have to face a new challenge and protest every upcoming day to overcome hurdle. Sometimes that protest is against the women's husband's family and sometimes against the society. Women have got many rights on the papers but the fact is that they always have to fight for their rights. There are many popular examples prevalent in the society. Some of the evils are 'dowry system', 'sati pratha', and 'veil system' or 'childhood marriage'. All the rights were achieved only after a long battle against the society.

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